सीएस व डीएस के बयान से कटघरे में चिकित्सा व्यवस्था
Updated at : 08 Jul 2016 6:45 AM (IST)
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मोतिहारी : सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था एक बार फिर कटघरे खड़ा है. स्नेक बाइट (सर्पदंश) के मरीज व्यवसायी महेंद्र साह की मौत के बाद सिविल सर्जन प्रशांत कुमार व ड्यूटी पर मौजूद अस्पताल उपाधीक्षक का अलग-अलग बयान अस्पताल की व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. सिविल सर्जन का कहना है कि सदर अस्पताल […]
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मोतिहारी : सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था एक बार फिर कटघरे खड़ा है. स्नेक बाइट (सर्पदंश) के मरीज व्यवसायी महेंद्र साह की मौत के बाद सिविल सर्जन प्रशांत कुमार व ड्यूटी पर मौजूद अस्पताल उपाधीक्षक का अलग-अलग बयान अस्पताल की व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है.
सिविल सर्जन का कहना है कि सदर अस्पताल में 150 पीस एंटी स्नेक वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ मनोज कुमार ने मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों को जो लिखित दिया है, उसमें स्पष्ट लिखा है कि अस्पताल में एंटी स्नेक वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में नहीं है. सिर्फ तीन पीस एंटी स्नेक वैक्सीन था, जिसमें एक वैक्सीन स्टैक व एक वैक्सीन का पांच प्रतिशत डिस्टिल वॉटर में मिला कर मरीज को दिया गया.
उन्होंने यह भी कहा है कि स्नेक बाइट के मरीज को 15 भाइल इंजेक्शन की आवश्यकता होती है. सिविल सर्जन व अस्पताल उपाधीक्षक दोनों जिम्मेदार पदाधिकारी होते हैं. ऐसे में अगर सिविल सर्जन की बात सही है तो मरीज के मौत की सारी जिम्मेदारी अस्पताल उपाधीक्षक पर जाती है. यह जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है. पुलिस सबसे पहले यह जांच करे कि मंगलवार की रात अस्पताल के स्टॉक में एंटी स्नेक वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में थी या नहीं. स्नेक बाइट वैक्सीन की स्टॉक जांच में अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था की पोल खुल सकती है.
अगर नहीं था वैक्सीन तो करना चाहिए था रेफर : अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ मनोज कुमार अपने बयान से खुद फंसता दिख रहे हैं. उनका कहना है कि अस्पताल में एंटी स्नेक वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में नहीं था. अगर वैक्सीन नहीं था तो उन्होंने मरीज को पहले ही क्यों नहीं रेफर किया. मरीज जब पहली बार अस्पताल पहुंचा तो ड्यूटी पर मौजूद उपाधीक्षक ने टेटभेट की सुई व मरहम पट्टी कर वापस भेज दिया. घर पहुंचने पर जब स्थिति बिगड़ी तो फिर अस्पताल पहुंचने पर उसी डॉक्टर ने करीब डेढ़ घंटे तक इलाज किया. मरीज की मौत से परिजनों को बेखबर रखते हुए बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया.
समय पर रेफर या इलाज होता तो बच सकती थी जान : स्नेक बाइट के मरीज व्यवसायी महेंद्र साह को सदर अस्पताल के चिकित्सक ने समय पर रेफर किया होता तो उसकी जान नहीं जाती. अस्पताल में एंटी स्नेक वैक्सीन नहीं था तो चिकित्सकों को पहली बार में ही मरीज को रेफर कर देना चाहिए था,
लेकिन उन्होंने मरीज को रेफर नहीं किया. टेटभेट की सुई व मरहम पट्टी कर यह कहते हुए वापस कर दिया कि मरीज को कुछ नहीं हुआ है, जबकि उसके परिजनों ने अस्पताल आते ही बताया था कि उसके मरीज को सांप ने काटा है. यह चिकित्सक की लापरवाही नहीं तो और क्या कही जायेगी.
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