एचआइवी में हाइ रिस्क जोन बना पूर्वी चंपारण

Updated at : 29 May 2016 5:37 AM (IST)
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एचआइवी में हाइ रिस्क जोन बना पूर्वी चंपारण

चिंता. दो वर्ष में रोगियों की संख्या में हुई दोगुनी वृद्धि एचआइवी पोजेटिव मामले में पूर्वी चंपारण जिला हाई रिस्क जोन बनता जा रहा है. बीते दो वर्षों में यहां एचआइवी मरीजों की संख्या में दो गुणा वृद्धि दर्ज की गयी है. वर्ष 2014 में मरीजों की संख्या 885 थी जो बढ़कर 2016 में 1724 […]

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चिंता. दो वर्ष में रोगियों की संख्या में हुई दोगुनी वृद्धि

एचआइवी पोजेटिव मामले में पूर्वी चंपारण जिला हाई रिस्क जोन बनता जा रहा है. बीते दो वर्षों में यहां एचआइवी मरीजों की संख्या में दो गुणा वृद्धि दर्ज की गयी है. वर्ष 2014 में मरीजों की संख्या 885 थी जो बढ़कर 2016 में 1724 हो गयी है.
मोतिहारी : पूर्वी चंपारण जिला इन दिनों एचआइवी पोजेटिव के मामले में हाई रिस्क जोन बनता जा रहा है. लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या ने सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के सभी दावों की पोल इस जिले में एचआइवी पोजेटिव मरीजों की बढ़ती संख्या खोल रही है. मोतिहारी सहित आधा दर्जन प्रखंडों के गांवों में पीड़ितों की संख्या अच्छी-खासी है. सबसे आश्चर्य जनक पहलू तो यह है कि इन रोगियों में बारह वर्ष से नीचे के लड़के-लड़कियां भी शामिल हैं. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की माने तो पूर्वी चंपारण जिला में कुल 1724 एचआइवी मरीजों की संख्या है जिसमें 850 पुरुष, 730 महिलाएं, 87 लड़के, 49 लड़कियां व 8 हिजड़ा शामिल हैं.
एक नम्बर पर है ढाका
पूर्वी चंपारण जिला में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र ढाका है, जहां 72 पुरुष, 56 महिला, 4 लड़के, 2 लड़कियां व 2 हिजड़ा एचआइवी रोग से ग्रस्त हैं.
दूसरे नंबर पर है मोतिहारी
यहां 76 पुरुष, 48 महिला, 4 लड़का, 3 लड़कियां एचआइवी से ग्रस्त हैं.
घोड़ासहन का तीसरा स्थान
यहां 51 पुरुष, 41 महिला, 6 लड़के, 5 लड़कियां व 2 हिजड़ा एचआइवी से पीड़ित हैं.
चार साल के आंकड़े
जिले में एचआइवी पोजेटिव मरीजों की संख्या जहां अप्रैल 2012 से मार्च 2014 तक 885 थी वहीं यह संख्या अप्रैल 2014 से मार्च 2016 तक 1462 हो गयी है जो जिले के लिए चिंता का विषय है.
ये है लक्षण
नाजुक अंगों में फोड़े-फुंसी होना, नाजुक अंगों के पास गिल्टिया होना, शरीर पर चकते हो या फिर पेशाब में जलन हो तो गुप्त रोग हो सकता है.
बचाव के उपाय
इस तरह के लक्षण दिखे तो मरीजों को बेफिक्र होकर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए. यह कोई छुआ-छूत की बीमारी नहीं है. यह ठीक हो सकती है. इससे अंजान न बने. अपने को परिलक्षित नहीं करे.
सरकार की योजनाएं: सरकार इसकी रोकथाम के लिए समेकित परामर्श एवं जांच केंद्र खोल कर नि:शुल्क चिकित्सकीय सलाह व दवा दे रही है. प्रचार प्रसार के लिए होर्डिंग, पोस्टर, बैनर भी लगाये गए हैं. सरकार 18 साल के लड़के-लड़कियों को पढ़ने के लिए 15 सौ रुपया भी प्रोत्साहन राशि के रूप में देने का काम कर रही है. इसके लिए माता-पिता को किसी तरह की परेशानी नहीं उठानी होगी.
पीड़ितों में बच्चे भी शािमल
प्रभावित क्षेत्रों की सूची व मरीजों की संख्या
ढाका 136
मोतिहारी 131
घोड़ासहन 105
चिरैया 96
केसरिया 96
हरसिद्धि 94
चकिया 92 सहित अन्य शामिल है.
मरीजों की बढ़ रही संख्या चिंता जनक है वहीं यह हाई रिस्क जोन की ओर बढ़ रहा है. इसका एक मात्र कारण अज्ञानता हो सकता है. इसकी रोकथाम के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में डोर-टूू-डोर लोगों को जागरूक करना आवश्यक है.
– डॉ चन्द्र सुभाष, एसएमओ, एड्स कंट्रोल सदर अस्पताल
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