नाम सेवा का, काम लूट का : औबेदुल्लाह के गांव में इलाज के लिए हो रहा है चंदा

Updated at : 03 May 2015 8:54 AM (IST)
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नाम सेवा का, काम लूट का : औबेदुल्लाह के गांव में इलाज के लिए हो रहा है चंदा

रक्सौल : कहने को तो डंकन अस्पताल चैरिटेबल है, लेकिन बिना पैसा जमा किये. यहां के डॉक्टर तड़पते लोगों को हाथ तक नहीं लगाते. भूकंप में पीड़ित लोगों की सहायता के लिए पूरा देश दिल खोल मदद कर रहा है. लेकिन डंकन बिना पैसा इलाज नहीं कर रहा. ऐसा ही एक मामला शुक्रवार को सामने […]

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रक्सौल : कहने को तो डंकन अस्पताल चैरिटेबल है, लेकिन बिना पैसा जमा किये. यहां के डॉक्टर तड़पते लोगों को हाथ तक नहीं लगाते. भूकंप में पीड़ित लोगों की सहायता के लिए पूरा देश दिल खोल मदद कर रहा है.
लेकिन डंकन बिना पैसा इलाज नहीं कर रहा. ऐसा ही एक मामला शुक्रवार को सामने आया, आदापुर के उच्चिडीह गांव निवासी मो ओबैदुल्लाह देवान का. ओबैदुल्लाह के पैर पर काठमांडू में दीवार गीर गयी और उसका पैर टूट गया. पैर की हड्डी बाहर आ गयी.
काठमांडू के कलंकी स्थित ओम हॉस्पिटल में इलाज हुआ. 30 हजार रुपया में एंबुलेंस भाड़ा देकर रक्सौल पहुंचा. डंकन अस्पताल में भरती हो गया. पहले दस हजार परिजनों ने जमा कराया.
फिर 60 हजार व्यवस्था के लिए बोला गया. ओबैदुल्लाह के गांव में उसके इलाज के लिए चंदा होने लगा. जब जिलाधिकारी को जानकारी मिली तो उन्होंने ने हजारीमल कैंप में उपस्थित डंकन के कर्मी को बुलाया और कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो डंकन अस्पताल को एक घंटा में खाली करा दिया जायेगा. कर्मी ने असमर्थता जतायी. फिर जिलाधिकारी ने डंकन के अधिकारियों से बात की और कहा उसका पैसा वापस हो रहा है.
यह सिर्फ एक मामला है, लेकिन इसके अलावे कई मामले हैं, जिसमें डंकन पैसा ले रहा है. गम्हरीयाकला निवासी लालबाबू दास का पैर काठमांडू में भूकंप के दौरान छत से कूद जाने के कारण हो गया था. वह एसएसबी कैंप रक्सौल पहुंचा. एसएसबी कैंप उसे डंकन अस्पताल में रेफर किया और डंकन अस्पताल ने बतौर एडवांस लालबाबू के परिजनों से 6 हजार रुपया जमा कराया है.
मात्र 25 रुपये रेंट
डंकन अस्पताल सरकारी जमीन पर स्थित है. सेवा के नाम पर यह जमीन डंकन को मिली है. इसके बदले में वह राज्य सरकार को 25 रुपया प्रतिमाह का रेंट देता है. प्रभारी जिलाधिकारी भरत दूबे कहते है कि रक्सौल में दो एकड़ जमीन दिया गया है और ऐसी स्थिति में वह पैसा लेकर इलाज करेगा तो जमीन वापस ले ली जायेगी.
ज्ञात हो कि रक्सौल में दो एकड़ जमीन की कीमत करोड़ों में होगी. बावजूद डंकन अस्पताल विपदा की इस घड़ी में बिना पैसा का इलाज नहीं कर रहा है. तो सामान्य स्थिति में गरीब मरीजों का कैसे मुफ्त इलाज करता होगा, सहज अनुमान लगाया जा सकता है.
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