जल-जीवन-हरियाली पर मानव शृंखला दुनिया के लिए उदाहरण बनेगी

Updated at : 05 Dec 2019 1:41 AM (IST)
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जल-जीवन-हरियाली पर मानव शृंखला दुनिया के लिए उदाहरण बनेगी

अरेराज(मोतिहारी) : अपार जल संपदा वाले उत्तर बिहार में भी भू जल स्तर में गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जल, जीवन व हरियाली का एक-दूसरे से गहरा संबंध है. जीवन, हरियाली और जल के बीच में है, जिसे बचाये रखने की जरूरत है. इसी को ले 19 जनवरी, […]

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अरेराज(मोतिहारी) : अपार जल संपदा वाले उत्तर बिहार में भी भू जल स्तर में गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जल, जीवन व हरियाली का एक-दूसरे से गहरा संबंध है. जीवन, हरियाली और जल के बीच में है, जिसे बचाये रखने की जरूरत है. इसी को ले 19 जनवरी, 2020 को पूरे बिहार में मानव श्रृंखला बनेगी, जो देश ही नहीं, बल्कि विश्व के लिए उदाहरण बनेगा. पहले भी शराबबंदी, बाल विवाह व दहेज प्रथा के खिलाफ मानव शृंखला बना कर बिहार ने पूरे देश को संदेश दिया है.

जल जीवन हरियाली यात्रा के दूसरे दिन बुधवार को मुख्यमंत्री अरेराज पहुंचे. यहां उन्होंने 1020 करोड़ रुपये की लागत की 589 योजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन किया. अरेराज हाइ स्कूल मैदान में आयोजित जागरूकता बाकीसम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से भू जल बचाने और पर्यावरण के संरक्षण की अपील की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपारण से गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की और उन्हें सफलता मिली. हमने भी चंपारण से ही अब तक की सभी यात्राएं शुरू की है. जन सहयोग भी मिला है. जल, जीवन हरियाली योजना में भी सभी के सहयोग से पर्यावरण जल संरक्षण पर बड़ा काम करेंगे.

सीएम ने कहा कि हर घर नल का जल, गली नली पक्की योजना, हर घर बिजली अभियान बिहार से शुरू हुआ, जिसका अनुसरण विभिन्न प्रदेशों में किया जा रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जल जीवन हरियाली अपने लिए ही नहीं भावी पीढ़ी के लिए हम सब काम कर रहे हैं. इसके लिए 24500 करोड़ की योजना बनी है.

तीन वर्षों में मिशन मोड के तहत इसे पूरा किया जायेगा. इस दौरान करीब 19 करोड़ पौधे भी लगाये जायेंगे. उन्होंने जलवायु परिवर्तन को देखते हुए मौसम आधारित खेती पर जोर दिया और कहा कि जंगल, पहाड़ी क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए चेक डेम का निर्माण किया जायेगा.

सरकारी भवनों से बारिश का पानी संरक्षित करने के लिए सोख्ता का निर्माण किया जायेगा. झारखंड बंटवारे के बाद हरित आवरण में कमी आयी है, लेकिन पिछले 15 वर्षों में इसे हमने बढ़ाने का काम किया है. नर्सरी में जगह-जगह पौधे लगाये जा रहे हैं, ताकि इसे आम लोगों को दिया जा सके. जल संरक्षण के लिए राज्य में एक लाख तालाब, अाहर व पइन को चिह्नित किया गया है.

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