चार जिलों में 18 करोड़ की जगह मिल रहे दो करोड़ रुपये
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Apr 2018 5:12 AM
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नोट वाहन लगते ही लोगों की लग जा रही है लंबी कतार प्रतिदिन 185 एटीएम के लिए चाहिए 37 करोड़ रुपये मोतिहारी : शहर में एटीएम व बैंकों में पैसे के लिए जा रहे लोग वापस लौट रहे हैं. एटीएम पर पैसे नहीं है का बोर्ड लगा है. कुछ एटीएम खुले हैं, उससे सिर्फ पर्ची […]
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नोट वाहन लगते ही लोगों की
लग जा रही है लंबी कतार
प्रतिदिन 185 एटीएम के लिए
चाहिए 37 करोड़ रुपये
मोतिहारी : शहर में एटीएम व बैंकों में पैसे के लिए जा रहे लोग वापस लौट रहे हैं. एटीएम पर पैसे नहीं है का बोर्ड लगा है. कुछ एटीएम खुले हैं, उससे सिर्फ पर्ची निकल रहा है. मायूस लोग रुपये के लिए सूदखोर के चंगुल में फंस रहे हैं.
बैंककर्मियों की मानें तो नवंबर-दिसंबर 2017 से ही मांग के अनुसार आरबीआई से रुपये नहीं मिल रही है. ऐसे में यह समस्या धीरे-धीरे गंभीर हो गयी, जो आज लोगों के लिए परेशानी का कारण है. पूर्वी चंपारण में विभिन्न बैंकों के 185 एटीएम है, जहां प्रति एटीएम औसतन 18-20 लाख रुपये की जरूरत है. यानि कुल रुपये प्रतिदिन एटीएम के लिए 37 करोड़ चाहिए. लेकिन कहीं 20 हजार तो कहीं 50 हजार तो कहीं पांच लाख रुपये डालकर काम चलाया जा रहा है.
बलुआ टाल स्थित सेंट्रल बैंक के एटीएम से बुधवार शाम से गुरुवार 12 बजे तक 18 लाख रुपये निकल गये. एलडीएम कार्यालय के सहायक प्रबंधक अखिलानंद पाठक ने बताया कि इस जोन में मोतिहारी, बेतिया, गोपालगंज व सीवान चार जिले है, जिसमें 90 एटीएम है. जरूरत 18 करोड़ की है लेकिन डाला जा रहा है दो करोड़ के आसपास. पैसे के लिए आरबीआई को पत्र लिखा गया है. राशि आवंटन के साथ समस्या समाप्त हो जायेगी. एटीएम में पैसा न डालने का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि 100, 50 व 20 रुपये के नोट है
जो एटीएम नहीं ले पा रहा है. पूछने पर श्री पाठक ने बताया कि पूर्व चंपारण के 185 में करीब 100 एटीएम चालू तो है लेकिन पैसे के आभाव में निकासी नहीं हो पा रही है. ऐसे में उपभोक्त सवाल उठा रहे है कि 2000 व 500 के नोट कहां गये. स्टेट बैंक कचहरी शाखा के प्रबंधक समर कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एक-दो दिन में राशि आवंटन के साथ समस्या पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है.
नहीं हो सका इलाज
पैसे का अभाव इतना विचलित कर सकता है, इसका सहज अंदाजा लगाना मुश्किल है. अरेराज निवासी गणेश प्रसाद इलाज कराने मोतिहारी पहुंचे थे. उन्हें डायबिटीज था. चांदमारी स्थित एक एटीएम के पास खड़े थे. चेहरे पर खामोशी थी. पूछने पर बताया कि एक घंटों हो गईल, अब तक बचवा नईखे आईल, पैसे निकाले गेल रहे एटीएम से. बातचीत के बीच उनका पुत्र पहुंचता था. चेहरे पर मायुसी झलक रही थी. पिता के पूछने पर कि हो गईल पैसा के इंतजाम. बाबूजी नईखे होईल, कोनों एटीएम पर पैसे नईखे. इस पर पिता-पुत्र के बीच खामोशी छा जाती है. कुछ देर रूकने के बाद गणेश प्रसाद बोलते हैं कि छोरो अब आईल जाई अगला सप्ताह.किसी के घर में शादी है, तो शहर से दूर पढ़ रहे अपने बच्चें को पैसे भेजने की चिंता.
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