मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट

Updated at : 17 Jan 2018 5:46 AM (IST)
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मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट

मोतिहारी : जिले में भीषण ठंड का कहर पूरे परवान पर है. एक पखवाड़े से बढ़ी शीतलहर ने जन-जीवन को झकझोर कर रख दिया है. गलन भरी सर्दी से सभी बेहाल हैं. खासकर, रोज कमाने खाने वाले दिहाड़ी मजदूरों की रोजी रोटी पर ठंड ने संकट खड़ा कर दिया है. हाथ कांपने से रोजाना फावड़ा […]

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मोतिहारी : जिले में भीषण ठंड का कहर पूरे परवान पर है. एक पखवाड़े से बढ़ी शीतलहर ने जन-जीवन को झकझोर कर रख दिया है. गलन भरी सर्दी से सभी बेहाल हैं. खासकर, रोज कमाने खाने वाले दिहाड़ी मजदूरों की रोजी रोटी पर ठंड ने संकट खड़ा कर दिया है. हाथ कांपने से रोजाना फावड़ा चलाने वाले अधिकांश मजदूर काम-धाम छोड़कर आग के सहारे दिन गुजारने को विवश हैं. इसके बावजूद सैकड़ों की संख्या में रोजगार की तलाश में मजदूरों का शहर का भटकन यूं ही जारी है.

शनिवार को सैकड़ों की संख्या में बलुआ चौक पर रोजगार की तलाश में पहुंचे मजदूरों ने प्रभात खबर से अपना दर्द बयां किया. हरसिद्धि निवासी रामशंकर साह ने बताया कि सप्ताहभर से पड़ रही सर्दी इतनी बढ़ चुकी है, कि समस्याएं मुंह बाए खड़ी है. अगर मजदूरी पर जाते हैं तो तन ढकने के लिए कपड़े नहीं हैं. वहीं मजदूरी पर नहीं जाते हैं तो दो वक्त की रोटी जुटाने के लाले पड़ जायेंगे. रोजगार मिलने के सवाल पर तुरकौलिया निवासी महेश कुमार ने बताया कि स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब रोजगार नहीं मिलने पर घर बैरंग लौटना पड़ता है. किस मुंह से घर जायेंगे, पैसे कहां हैं. बच्चे पूछेंगे कि कहां है पैसे तो क्या कहेंगे.

ऐसे सभी सवाल सोचने पर मजबूर कर देता है. आज भी अगर काम नहीं मिली तो पैदल गांव चले जायेंगे. ललन, मो तवारत, एहसान अहमद आदि दर्जनों मजदूरों ने बताया कि भीषण ठंड में रोज खाने कमाने वाले मजदूरों के सामने बड़ी समस्या है. अगर दिन में कमाएंगे नहीं तो परिवार के सदस्यों को पेट कैसे भर पायेंगे. ठंड के बारे में पूछने पर ललन, पंकज, रामदास, एहसान अहमद ने ठंड के सवाल पर बताया कि बाबू ठंड बड़े लोगों को लगती है. हमारे लिए ठंड या गर्मी नहीं, भूख ही बाख है.

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