छतौनी बस पड़ाव: 34 लाख रुपये सालाना आमदनी, सुविधा नदारद
Updated at : 19 Nov 2017 5:42 AM (IST)
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मोतिहारी : शहर के छतौनी बस पड़ाव में यात्रियों को मिल रही नगण्य सुविधा ने प्रशासन के दावे की पोल खोल दी है. प्रति वर्ष लगभग 34 लाख रुपया का राजस्व प्राप्ति के बावजूद नगर परिषद यात्री सुविधा को लेकर संजीदा नहीं है. सुविधा देना तो दूर, नगर परिषद साफ-सफाई कराने को लेकर भी फिक्रमंद […]
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मोतिहारी : शहर के छतौनी बस पड़ाव में यात्रियों को मिल रही नगण्य सुविधा ने प्रशासन के दावे की पोल खोल दी है. प्रति वर्ष लगभग 34 लाख रुपया का राजस्व प्राप्ति के बावजूद नगर परिषद यात्री सुविधा को लेकर संजीदा नहीं है. सुविधा देना तो दूर, नगर परिषद साफ-सफाई कराने को लेकर भी फिक्रमंद नहीं है.
पड़ाव स्थित प्रतीक्षालय व इसके आसपास कूड़ा-कचरा का अंबार लगा है. इससे निकलती बदबू ने यात्रियों का जीना मुहाल कर दिया है. यही नहीं उक्त पड़ाव में शौचालय तो है, लेकिन स्थिति दयनीय है. इस कारण यहां आने वाले यात्रियों को शर्मींदगी झेलनी पड़ती है. जब सरकार खुले में शौच के
खिलाफ है तो यूं कहें कि नगर परिषद महकमा इससे इत्तेफाक नहीं रखता तो आश्चर्य नहीं.
बताते चले कि उक्त पड़ाव से सैकड़ों बसों का आवागमन दिल्ली, गोरखपुर के अलावा झारखंड के विभिन्न क्षेत्र सहित सभी गैर जिलों में होता है. प्रतिदिन सैकड़ों सवारियां यहां आती हैं. लेकिन, पूरे परिसर में न तो शौचालय न यात्रियों के बैठने और न पेय जल की सुविधा मयस्सर नहीं होना यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है. सूत्र बताते हैं कि दिन ढलते ही अराजकतत्व व मनचलों के खौफ के कारण महिला यात्री यहां आती ही नहीं है. रात के पहर उक्त पड़ाव में बिजली की सुविधा नहीं होने के कारण बस संचालकों को मुख्य रोड पर खड़ा करना पड़ता है, जो प्रशासन के उदासीनता की पोल खोलती है.
रात में बिजली रहती है गुल : बस पड़ाव में दिन ढलते ही यात्रियों के लिए चुनौतियां काफी बढ़ जाती है. इसलिए कि यहां बिजली की सुविधाओं का नहीं होना हैं. वाहनों को मुख्य रोड पर सवारी भरने के कारण आयेदिन जाम की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है. यात्रियों की माने तो रात में स्थिति कुछ ज्यादा ही चुनौतीपूर्ण हो जाती है. क्योंकि, रात के वक्त रहने की व्यवस्था व बिजली का नहीं होना है. वहीं अराजकतत्व व मनचलों का पड़ाव में साम्राज्य स्थापित होना भी मुख्य कारण है.
पेयजल की व्यवस्था नदारद : बस पड़ाव में पेयजल की व्यवस्था है. वहीं शौचालय की स्थिति दयनीय होने के कारण यात्रियों को शौच की स्थिति में खुले मैदान का सहारा लेना पड़ता है. वहीं पेयजल के लिए पड़ाव के आसपास सजी होटलों की. लेकिन, प्रशासनिक व्यवस्थाओं का अभाव यात्रियों को खूब खटकता है. पटना जाने के लिए बस पकड़ने पहुंचे राजेश सिंह ने यहां सुविधाओं का घोर टोटा है. मानों नगर परिषद ने सुविधाओं के प्रति फिक्रमंद नहीं है.
बताया जाता है कि, पड़ाव से नगर परिषद को प्रतिवर्ष लगभग 34 लाख रुपये की राजस्व प्राप्ति होती है. लेकिन, सुविधाओं ने नाम पर कागजी घोड़ा दौड़ाया जा रहा है. यात्री किराया देकर भी सुविधाओं से वंचित हैं. बताते चले कि प्रतिदिन उक्त पड़ाव से सैकड़ों बसों का आवागमन विभिन्न प्रांत व गैर जिलों के लिए होता है. प्रतिदिन सैकड़ों यात्री यहां आते हैं. सफाई की व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ जाती है.
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