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चारा घोटाला मामला: लालू यादव को मिली जमानत के खिलाफ CBI ने दी अर्जी, सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार

Updated at : 04 Apr 2022 5:26 PM (IST)
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चारा घोटाला मामला: लालू यादव को मिली जमानत के खिलाफ CBI ने दी अर्जी, सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार

Bihar News: सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से जल्द ही इस मामले में सुनवाई की जाएगी. सीबीआई ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें लालू प्रसाद यादव को जमानत पर रिहा करने को हरी झंडी दी गई है.

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चारा घोटाला में दोषी करार दिए गए RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव को दो मामलों में मिली जमानत को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से जल्द ही इस मामले में सुनवाई की जाएगी. सीबीआई ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें लालू प्रसाद यादव को जमानत पर रिहा करने को हरी झंडी दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर लालू यादव को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है. इस मामले में चार हफ्ते बाद सुनवाई होगी. सोमवार को जस्टिस एल नागेश्वर राव और बीआर गवई की बेंच ने लालू यादव की बेल अर्जी के खिलाफ याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया.

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

लालू यादव को झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका और चाईबासा कोषागार मामले में जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है, लेकिन चारा घोटाला के एक अन्य मामले में दोषी करार दिये जाने के कारण अभी वे जेल में है. इस मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बहस के दौरान CBI ने कहा कि लालू यादव को दी गयी जमानत के आदेश का आधार गलत है. लालू प्रसाद यादव ने अपेक्षित समय जेल में नहीं बिताया है. सीबीआई ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की जमानत की अर्जी मंजूर कर अपना फैसला सुनाया था कि लालू यादव पहले ही सजा का आधा हिस्सा काट चुके हैं, जबकि ये सही नहीं है.

पांच मामले में दोषी करार दिये गये हैं लालू प्रसाद यादव

जानकारी के अनुसार, चारा घोटाले से जुड़े कुल 5 मामले में लालू यादव को दोषी करार दिये गये हैं, जिनमें 950 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है. यह मामला जनवरी, 1996 में सामने आया था, जब चाइबासा के डिप्टी कमिश्नर अमित खरे ने पशु पालन विभाग में छापेमारी की थी. इसके बाद पटना हाई कोर्ट ने मार्च 1996 में सीबीआई को जांच करने का जिम्मा सौंपा था. इसके बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरु कर दी थी. इसके बाद जून, 1997 में सीबीआई ने जब चार्जशीट दाखिल की तो फिर लालू प्रसाद यादव का भी नाम जोड़ा गया, जिनका नाम उससे पहले नहीं था.

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