बिहार सरकार अब चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कर सकेगी जांच और कार्रवाई, अनियमित जमा योजना पाबंदी नियमावली को मंजूरी

बिहार अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी नियमावली 2023 को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है. जिसके बाद अब राज्य सरकार चिटफंड कंपनियों की जांच व कार्रवाई कर सकेगी. इस नियमावली का मकसद आम जनता को अवैध जमा योजनाओं और धोखाधड़ी से बचाना है.
बिहार में काम करनेवाली चिटफंड कंपनियों की जांच और उन पर कार्रवाई करने का अधिकार राज्य सरकार को मिल गया है. राज्य की आम जनता और जमाकर्ताओं से अवैध जमा योजनाओं के माध्यम से धन जमा कराने पर ऐसी कंपनियों पर कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार ही सक्षम प्राधिकार बन गयी है.
कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव डाॅ एस सिद्धार्थ ने बताया कि कैबिनेट द्वारा स्वीकृत पाबंदी नियमावली 2023 के प्रावधान में जो लोग जमा स्कीम चलाते हैं, वह इसके अधीन हो जायेंगे. नियमावली में बिहार सरकार को सक्षम प्राधिकार बनाया गया है. इससे राज्य सरकार जमा स्कीम चलाने वाली कंपनियों की जांच करने, उनकी ऑडिट करने और अनियमितता पाये जाने के बाद कार्रवाई करने की शक्ति मिल गयी है. इतना ही नहीं, राज्य सरकार को उनकी संपत्ति जब्त करने और बेचने की सभी प्रक्रिया इस नियमावली के तहत अपनायी जायेगी.
राज्य के अंदर किसी भी क्षेत्र में छोटे-छोटे जमा योजना चलाये जाते हैं, उनके खिलाफ इस नियमावली के तहत कार्रवाई की जायेगी. नयी नियमावली से आम जनता को अवैध जमा योजनाओं और धोखाधड़ी से बचाना है. साथ ही सरकार को आरोपित के खिलाफ कड़ी सजा और भारी आर्थिक जुर्माना के साथ ही उनकी संपत्तियों की कुर्की जब्ती कर उन मामलों में निवेशकों की जमा राशि की वापसी या पुनर्भुगतान करने की शक्ति मिल गयी है.
कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव ने बताया कि कोविड 19 और यूक्रेन युद्ध के कारण उत्पन्न स्थिति को देखते हुए विदेशों से मेडिकल ग्रेजुएट करनेवाले विद्यार्थियों को अब राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा. इतना ही नहीं, ऐसे विदेश से ग्रेजुएट करनेवाले विद्यार्थियों को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के समरूप छात्रवृत्ति भी दी जायेगी. विदेशों से मेडिकल ग्रेजुएट करनेवाले छात्रों को इंटर्नशिप की कुल सीटों में से 7.5 प्रतिशत सीटों पर इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा. उन्होंने बताया कि एनएमसी के दिशा निर्देशों के अनुसार स्टेट मेडिकल काउंसिल में निबंधन के क्रम में इंटर्नशिप के लिए राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में इंटर्नशिप की सुविधा देना है. इसके लिए उन छात्रों से कोई राशि या शुल्क नहीं लिया जायेगा.
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विभिन्न स्तर के न्यायालयों में काम करनेवाले सरकारी वकीलों का चयन अब राज्य स्तरीय चयन समिति करेगी. यह समिति महाधिवक्ता के अध्यक्षता में गठित होगी. इसमें विधि सचिव, विधि विभाग के विशेष सचिव या संयुक्त सचिव सदस्य होंगे. यह समिति जिला स्तर पर पीपी, जीपी, एपीपी, एजीपी, हाइकोर्ट के लिए एडिशनल एडवोकेट जनरल, गवर्नमेंट एडवोकेट, प्लीडर, स्टैंडिंग काउंसिल, पब्लिक प्रोस्क्युटर और सुप्रीम कोर्ट के लिए एडिशनल एडवोकेट जनरल और स्टैंडिंग काउंसिल का चयन करेगी. कैबिनेट ने इसके लिए बिहार विधि पदाधिकारी (वचनबद्धता) नियमावली 2023 को स्वीकृति दे दी है. नयी नियमावली में सरकारी वकीलों के प्राइवेट प्रैक्टिस करेंगे या नहीं करेंगे, इसको लेकर भी प्रावधान किया गया है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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