buxar news : चौसा. थर्मल पावर प्लांट 1320 मेगावाट चौसा में निर्माण कार्य के दौरान एक हादसे में एक मजदूर की मौत हो गयी. मृतक की पहचान राजकुमार मल्लाह (44 वर्ष) के रूप में हुई है, जो बिहार के गयाजी जिले के फतेहपुर, भगवानपुर निवासी था.
बताया जा रहा है कि राजकुमार चौसा प्लांट परिसर में एल एंड टी के अंतर्गत पावर मैक कंपनी में ग्राइंडर से भारी-भरकम पाइप का काम कर रहा था, इसी दौरान पाइप सरक गया, जिसके नीचे वह दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया. जब तक पाइप हटाकर उसे बाहर निकाला जाता, तब तक घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो चुकी थी. घटना की जानकारी मिलते ही प्लांट में काम कर रहे अन्य मजदूरों आक्रोशित हो गये. मजदूरों ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा और नौकरी देने की मांग शुरू कर दी. मांगों को लेकर मजदूरों ने काम पूरी तरह से ठप कर दिया, जिससे प्लांट का निर्माण कार्य बंद हो गया. घटना की सूचना पर मुफ्फसिल थाना प्रभारी शंभू भगत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे.उन्होंने आक्रोशित मजदूरों को समझा-बुझाकर शांत कराया और स्थिति को नियंत्रित किया. साथ ही प्लांट के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया और मजदूरों की मांगों पर बातचीत के जरिये सहमति बनायी गयी. पुलिस द्वारा मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गयी है. फिलहाल मजदूर के शव को अपने कब्जे में लेकर पुलिस बक्सर ले गयी. वहां परिजन के पहुंचने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जायेगी. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गयी है और यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण हुआ या किसी अन्य वजह से. साथी वर्करों की माने, तो काम का दबाव और सेफ्टी बेल्ट के न होने से ही एक वर्कर की जान चली गयी.
मजदूरों की सेफ्टी के साथ खिलवाड़ कर रही निर्माण कंपनी : इंटक नेता
मौके पर पहुंचे विद्युत इंटक के प्रदेश महासचिव रामप्रवेश सिंह और मुफ्फसिल थाना प्रभारी शंभू भगत ने आक्रोशित मजदूरों से उनकी मांगें और समस्याएं सुनीं. इंटक नेता रामप्रवेश सिंह ने बताया की प्लांट में निर्माण कंपनी द्वारा मजदूरों की सेफ्टी को लेकर काफी लापरवाही बरती जा रही है. मजदूरों का कहना था कि सेफ्टी बेल्ट खराब है, फिर भी इसी को लगाकर काम करना पड़ता है. ऊंचाई पर काम करने के लिए हाइट पास एक भी लोगों को नहीं दिया गया है. फिर भी हाइट पर काम कराया जाता है. हाइट पर काम करने वालों को 20 हजार रुपये मिलता है, जबकि 25 हजार रुपये मिलना चाहिए. यहां पर सेफ्टी बिलकुल जीरो है. मौसम खराब है, फिर भी दबाव देकर ऊपर चढ़ाया जाता है. ठेकेदार द्वारा दबाव देकर हेल्पर और खलासी से ऊपर का काम कराया जाता है. मजदूरी भी समय से नहीं दी जाती.
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