खबर छपने के बाद शनिवार से शुरू हुई 15 दिन से बंद जलापूर्ति

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खबर छपने के बाद शनिवार से शुरू हुई 15 दिन से बंद जलापूर्ति

गौरतलब है कि केशवपुर जलापूर्ति केंद्र के अंतर्गत आने वाले सोनवर्षा और गढ़नी की जलापूर्ति की पानी टंकी से सप्लाई पिछले करीब 15 दिनों से 18 वार्डों में बाधित थी.

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बक्सर. केशवपुर में 15 दिनों से जलापूर्ति ठप, हजारों की आबादी परेशान शीर्षक से प्रभात खबर में शनिवार को पेज नंबर सात पर छपी खबर के बाद अहले सुबह ही अधिकारियों की नींद खुली और मौके पर पहुंचकर लिकेज पाइल को ठीक की. लिहाला शनिवार को लोगों के घरों में जलापूर्ति का पानी नलों से गिरने लगा. गौरतलब है कि केशवपुर जलापूर्ति केंद्र के अंतर्गत आने वाले सोनवर्षा और गढ़नी की जलापूर्ति की पानी टंकी से सप्लाई पिछले करीब 15 दिनों से 18 वार्डों में बाधित थी. इस दौरान ग्रामीणों को पेयजल के गंभीर संकट का सामना करना पड़ा. कभी ट्रांसफाॅर्मर जलना, कभी स्टार्टर खराब होना तो कभी पाइप लाइन में लिकेज जैसी समस्याओं का हवाला देकर विभाग पानी आपूर्ति को टालता रहा. लेकिन इस बार समस्या लंबे समय तक जस की तस बनी रही, जिससे लोग खासे परेशान थे. प्रभात खबर ने ग्रामीणों की परेशानी को प्राथमिकता देते हुए मंगलवार और शुक्रवार को इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया. खबर छपने के बाद विभाग की तंद्रा टूटी और शनिवार की सुबह से पीएचईडी की टीम सक्रिय होकर जलापूर्ति बहाल करने में जुट गयी. आखिरकार दोपहर तक सोनवर्षा और गढ़नी टंकी से पानी की सप्लाइ फिर से शुरू हो गई, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली. ग्रामीणों का कहना है कि जलापूर्ति बंद होने से उन्हें रोजाना की जरूरतों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. कई लोग नजदीकी, हैंडपंप के सहारे काम चला रहे थे. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब विभाग ने समस्या को नजरअंदाज किया हो. जब-जब प्रभात खबर ने केशवपुर जलापूर्ति केंद्र की गड़बड़ियों, लापरवाहियों और तकनीकी अव्यवस्थाओं को प्रमुखता से उठाया है तभी विभाग हरकत में आया है. क्या कहते हैं ग्रामीण पीएचइडी विभाग अगर समय से देखभाल करता तो 15 दिन तक जलापूर्ति बंद नहीं रहता. विभाग का यह आदत बन गया है जब तक पेपर में प्रकाशित नहीं होता है तब तक उसे संज्ञान नहीं लेता है. 22 नवंबर- फोटो -10- संजू चौधरी केशवपुर जलापूर्ति केंद्र से तो पानी आना शुरू हो गया है, लेकिन जो पानी आ रहा है बहुत गंदा पानी आ रहा है. अगर उसे पीने के उपयोग में लाया जाता है तो बीमारी होना लगभग तय है. जिस उद्देश्य से सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किया वह उद्देश्य केवल विभाग के कागज पर है. 22 नवंबर- फोटो- 11- जयप्रकाश राय

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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