बक्सर. जिले में आधार कार्ड जैसी अत्यंत आवश्यक पहचान सेवा की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है. ग्रामीण कार्य विभाग के द्वारा बक्सर जिले में संचालित कुल 17 आधार कार्ड सेंटरों में से वर्तमान समय में मात्र चार सेंटर राजपुर प्रखंड मुख्यालय, इटाडी प्रखंड मुख्यालय, चक्की प्रखंड मुख्यालय, अनुमंडल कार्यालय डुमरांव में काम कर रहे हैं, जबकि शेष 13 सेंटर पूरी तरह बंद पड़े हैं. इन सेंटरों के बंद हो जाने से आधार नामांकन और संशोधन का पूरा दबाव अब बैंक और कॉमन सर्विस सेंटर द्वारा संचालित केंद्रों पर आ गया है. इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है, जिन्हें लंबी कतारों, समय की बर्बादी और मनमानी वसूली का सामना करना पड़ रहा है. जिले के विभिन्न प्रखंडों में ग्रामीण कार्य विभाग के अधीन खोले गए आधार कार्ड सेंटरों का उद्देश्य था कि ग्रामीण इलाकों के लोगों को अपने ही क्षेत्र में आधार से संबंधित सेवाएं मिल सकें. लेकिन हकीकत यह है कि विभागीय उदासीनता, तकनीकी संसाधनों की कमी और ऑपरेटरों की अनुपलब्धता के कारण अधिकतर सेंटरों पर लंबे समय से काम बंद है. कई स्थानों पर सेंटर खुले होने का बोर्ड तो लगा है, लेकिन अंदर ताले लटके हुए हैं. ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित 13 सेंटरों के बंद होने का सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ है कि लोगों को मजबूरी में बैंक और सीएससी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है. इन सेंटरों पर पहले से ही अन्य सेवाओं का भार रहता है, ऐसे में आधार कार्ड बनवाने या उसमें सुधार कराने के लिए लोगों को सुबह से ही लाइन में लगना पड़ता है. कई जगहों पर हालात यह हैं कि लोग सुबह आठ-दस बजे से कतार में खड़े हो जाते हैं, लेकिन शाम तक भी उनका नंबर नहीं आ पाता. बैंक द्वारा संचालित आधार कार्ड सेंटरों पर भीड़ इतनी अधिक है कि वहां व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. लोगों का आरोप है कि आधार कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के नाम पर 300 से 500 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है, जबकि सरकारी नियमानुसार आधार नामांकन और अधिकांश अपडेट सेवाएं बेहद मामूली शुल्क पर उपलब्ध हैं. मुकेश कुमार ने बताया कि यदि अतिरिक्त पैसा नहीं दिया जाए तो उनका काम टाल दिया जाता है या फिर तकनीकी कारणों का हवाला देकर लौटा दिया जाता है. सीएससी द्वारा संचालित आधार कार्ड सेंटरों की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है. यहां भी सुबह से लंबी कतारें लग जाती हैं. महिलाएं, बुजुर्ग और दूर-दराज के गांवों से आये लोग घंटों इंतजार करते नजर आते हैं. कई बार पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आने पर लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है और फिर दूसरे या तीसरे दिन दोबारा आना पड़ता है. इस प्रक्रिया में न केवल समय और पैसा बर्बाद होता है, बल्कि दिहाड़ी मजदूरों और गरीब परिवारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है. बिटु ठाकुर ने बताया कि आधार कार्ड आज हर सरकारी योजना की चाबी बन चुका है. चाहे राशन कार्ड से अनाज लेना हो, मनरेगा में काम करना हो, पेंशन, छात्रवृत्ति, आयुष्मान भारत या बैंक से जुड़े किसी भी कार्य के लिए आधार अनिवार्य है. ऐसे में आधार सेंटरों का बंद रहना आम जनता के अधिकारों पर सीधा असर डाल रहा है. कई लोगों के जरूरी काम सिर्फ इसलिए अटके पड़े हैं, क्योंकि वे आधार अपडेट नहीं करा पा रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारी इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं.बार-बार शिकायत के बावजूद बंद पड़े सेंटरों को चालू कराने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है. यदि सभी 17 आधार कार्ड सेंटर नियमित रूप से संचालित होने लगें, तो न केवल भीड़ कम होगी बल्कि अवैध वसूली पर भी रोक लगेगी. प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. आधार जैसी महत्वपूर्ण सेवा में लापरवाही और निजी स्तर पर मनमानी वसूली प्रशासनिक निगरानी की कमी को दर्शाती है. जरूरत है कि ग्रामीण कार्य विभाग तत्काल प्रभाव से बंद पड़े आधार कार्ड सेंटरों को चालू कराए, पर्याप्त ऑपरेटर और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराएं तथा बैंक और सीएससी सेंटरों पर नियमित जांच कर अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई करे. क्या कहते हैं अधिकारी जब सीएससी सेंटर द्वारा आधार कार्ड बनाते समय अधिक पैसा लेने का मामला आता है तो जांच किया जायेगा और कार्रवाई भी किया जायेगा, जहां तक भीड़ की बात है, तो सच्चाई है कि सुबह से लाइन लग जाता है क्योंकि विभिन्न कारणों से आधार कार्ड सुधार के साथ साथ नया बनवाने के लिए आते हैं. समय समय पर सीएससी सेंटर का निरीक्षण किया जाता है. अभिषेक कुमार, जिला समन्वयक, सीएससी
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