Buxar News: बंगाल में सनातन धर्मावलंबियों पर किया जा रहा अत्याचार निंदनीय: देवकीनंदन

Published by : RAVIRANJAN KUMAR SINGH Updated At : 15 Apr 2025 9:24 PM

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आइटीआइ परिसर में चल रहे सात दिवसीय भागवत कथा के अंतिम दिन मंगलवार को देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि बंगाल में सनातन धर्मावलंबियों पर हो रहे अत्याचार बेहद चिंता का विषय है

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बक्सर

. आइटीआइ परिसर में चल रहे सात दिवसीय भागवत कथा के अंतिम दिन मंगलवार को देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि बंगाल में सनातन धर्मावलंबियों पर हो रहे अत्याचार बेहद चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को बंगाल की मुख्यमंत्री से यह प्रश्न करना चाहिए कि वहां के हिंदू नागरिकों की रक्षा क्यों नहीं हो रही है. क्या वे इस देश के नागरिक नहीं हैं? यदि किसी मुख्यमंत्री से अपने राज्य के नागरिकों की सुरक्षा नहीं हो रही, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, तो यह उनकी विफलता है और उन्हें त्यागपत्र दे देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या हुई, तब भी हम मौन रहे, और आज स्थिति यहां तक पहुँच गई है कि हमारे ही देश के राज्य बंगाल में हिंदुओं के साथ हिंसा हो रही है और देश चुप है. उन्होंने यह आह्वान किया कि अब मौन रहने का समय नहीं है . अंतिम दिन की कथा में पूज्य श्री चिन्मयानंद बापू जी महाराज ने शामिल होकर व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त कर कथा श्रवण किया एवं कथा पंडाल में उपस्थित भक्तों को संबोधित किया. कथा में श्री गंगापुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने शामिल होकर व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त कर कथा श्रवण किया एवं कथा पंडाल में उपस्थित भक्तों को संबोधित किया. कथा के दौरान पूज्य देवकी नंदन ठाकुर जी महराज ने बताया कि पहले हमारे घरों में गाय जैसे पवित्र पशुओं को स्थान दिया जाता था, जो हमारी संस्कृति और सनातन परंपरा के प्रतीक माने जाते हैं, लेकिन आजकल लोग कुत्ते पालने को अधिक महत्व दे रहे हैं. ऐसे घर जहां कुत्ते की पूजा की जाती है, वहां देवी-देवता और पितृगण अपनी उपस्थिति स्वीकार नहीं करते. यह हमारी सांस्कृतिक मूल्यों से दूर जाने का प्रतीक है. पहले जब घर में मेहमान आते थे तो घरवाले खुशी से स्वागत करते थे, परंतु आज के समय में मेहमानों को बोझ समझा जाता है. यह मानसिकता हमारे समाज के मूल स्वभाव – अतिथि देवो भवः – के विपरीत है. उन्होंने कहा कि जब भी पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं. यह सनातन धर्म का मूल सिद्धांत है – धर्म की रक्षा के लिए भगवान स्वयं अवतरित होते हैं.

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