Buxar News: रामरेखाघाट की नहीं हो रही सफाई श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी

Published by : RAVIRANJAN KUMAR SINGH Updated At : 11 Jun 2025 9:21 PM

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नगर की सफाई को लेकर भारी भरकम राशि खर्च नगर परिषद से प्रतिमाह किया जा रहा है

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बक्सर

. नगर की सफाई को लेकर भारी भरकम राशि खर्च नगर परिषद से प्रतिमाह किया जा रहा है. इसमें गंगा घाटों की सफाई पर भी बड़ी राशि खर्च किया जा रहा है. लेकिन गंगा घाटों की सफाई नगर परिषद के एजेंसी द्धारा नियमित नहीं कराया जाता है. नगर के महत्वपूर्ण एवं धार्मिक महता वाला घाट रामरेखाघाट की नियमित सफाई नहीं होने से कचरा जमा हो गया है. जिससे श्रद्धालुओं को घाट पर गंदगी के बीच ही धार्मिक कार्यों के साथ ही स्नान एवं पूजन करना पड़ रहा है. पूर्व में घाट की सफाई पर प्रतिमाह 12 लाख रूपये खर्च होता था.

इसके साथ ही नगर में पूर्व में इस राशि के साथ लगभग 84 लाख रूपये नगर के साथ घाट पर खर्च होता था. फिलहाल नगर परिषद ने नये साल में इस सफाई के बजट को बढ़ाकर 1 करोड़ 16 लाख रूपये कर दिया गया है. इसके बाद भी नगर एवं रामरेखाघाट की सफाई व्यवस्था पूर्व से काफी प्रभावित हो गया है. रामरेखाघाट के पुराने घाट पर पिछले कई दिनों से सफाई नहीं हाेने से कचरा अभी भी पड़ा हुआ है. गंगा दशहरा के दौरान लोगों द्धारा पूजन एवं दान के रूप में घाट पर दिये गये मटका के साथ ही अन्य प्रकार की जमा कचरे का उठाव नहीं हुआ है. इसके साथ ही नगर के बाजार समिति में भी पड़ा कचरा का उठाव 3 बजे तक नहीं किया गया था.बढ़ गया सफाई का बजट, फिर भी रामरेखाघाट गंदा: रामरेखाघाट के साथ ही विभिन्न गंगा घाटों की सफाई के लिए नगर परिषद पूर्व में 12 लाख रूपये की राशि खर्च करता था. उस दौरान रामरेखाघाट के नये पुराने सभी घाटों की बेहतर सफाई व्यवस्था थी. लेकिन बजट में वृद्धि के साथ ही रामरेखाघाट की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है. बजट बढ़ने के बाद भी रामरेखाघाट की सफाई का दायरा सिमट गया है. स्थानीय लोगों की मानें तो केवल नये बने घाट तथा पुराना विवाह मंडप तक अर्थात आरती के मंडप तक ही सीमित है. जबकि रामरेखाघाट का दायरा ताड़का नाला तक पहुंच गया है. ताड़का नाला तक पक्के घाटों का निर्माण हो गया है. लेकिन सफाई एजेंसी के द्धारा नहीं कराया जाता है. जिससे घाट के पूराना घाट समेत तड़का नाला तक बना घाट गंदगी भर गया है. पूरे घाट की सफाई का होता है भुगतान : नगर परिषद गंगा घाटों की सफाई को लेकर एजेंसी से लगातार भुगतान किया जाता है. लेकिन एजेंसी के द्धारा पूरे घाटों की सफाई कराये बिना ही भुगतान लिया जा रहा है. इस तरह लोंगों की गाढ़ी कमाई का सफाई के नाम पर दुरूपयोग हो रहा है. नगर परिषद से सफाई अभियान का मॉनिटरिंग व्यवस्था दोषपूर्ण होने के कारण नगर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है.

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