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नगर के निजी अस्पतालों में नहीं है मेडिकल वेस्ट की प्रबंधन सुविधा

Updated at : 20 Dec 2025 10:25 PM (IST)
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नगर के निजी अस्पतालों में नहीं है मेडिकल वेस्ट की प्रबंधन सुविधा

नगर में प्रतिदिन बेरोक टोक नीजी अस्पताल गली मुहल्लों में खुल रहे है. जिसपर जिले के स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है.

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बक्सर. नगर में प्रतिदिन बेरोक टोक नीजी अस्पताल गली मुहल्लों में खुल रहे है. जिसपर जिले के स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपने को केवल निजी अस्पतालों के कागज के आधार पर रजिस्ट्रेशन देने तक ही कार्य की इतिश्री मान लेते है. उसकी गतिविधियों एवं उसके गलत कार्यों के प्रति जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को किसी भी प्रकार की जबावदेही नहीं है. जिसके कारण नगर में संचालित होने वाले नीजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के मानकों का संचालन को लेकर किसी तरह का पालन नहीं किया जा रहा है. नगर के मुख्य सड़कों से लगे नीजी अस्पताल अपने मेडिकल वेस्ट कचरों को सीधे सड़क के किनारे व नालों में निस्तारण कर रहे है. इससे नगर के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खतरा उत्पन्न हो सकता है. नगर के बाईपास रोड के साथ ही चौसा रोड में अस्पतालों द्धारा नाला एवं सड़क के किनारे मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंक दिया गया है. यह स्थिति केवल एक दिन की नहीं है बल्कि नियमित होने वाली है. मेडिकल वेस्ट के गलत निपटान से एचआइवी, हेपेटाइटिस बी एवं सी, त्वचा संक्रमण, पेट का संक्रमण, फेंफड़ों का संक्रमण और बैक्टीरिया संक्रमण जैसी बीमारी की संभावना बनी रहती है.

निजी अस्पताल इस मामले में लापरवाह : जिले के निजी अस्पताल जिले वासियों के स्वास्थ्य के प्रति लगातार अनदेखी कर रहे है. अपने हर प्रकार के मेडिकल वेस्ट का प्रबंधन करने की बजाय सीधे खुले में आबादी के बीच ही नालियों एवं सड़क के किनारे अस्पतालों के आस-पास में मेडिकल कचरे का निस्तारण कर दिया जा रहा है. यह अस्पतालों की कार्यशैली आम लोगों के स्वास्थ्य के प्रति अनदेखी का मामला सामने आया है. अस्पताल सरकार के मानकों का पालन नहीं कर कचरे के प्रबंधन में मनमानी सामने आया है. मेडिकल कचरा वह है जो स्वास्थ्य संस्थानों से मानव हित के विरुद्ध निकलने वाला वेस्ट है. जो मानव स्वास्थ्य के साथ ही जीवों के लिए खतरनाक है. जो हानि पहुंचा सकता है. उसके निस्तारण को लेकर एजेंसी निर्धारित किया गया है. जिसे विशेष प्रबंधन की आवश्यकता होती है ताकि यह समाज और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए.

एजेंसी से नहीं किया जाता है नियमित उठाव : जिले में निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन को लेकर मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन को लेकर निर्धारित एजेंसी से एनओसी आवश्यक होता है. निजी अस्पताल के संचालक निर्धारित एजेंसी का भुगतान कर एनओसी व उठाव की सहमति ले ली जाती है. जिसके बाद निर्धारित मासिक भुगतान नहीं करने से मेडिकल वेस्ट का उठाव एजेंसी द्वारा नहीं किया जाता है. जिससे नियमित उठाव नहीं हो पा रहा है. अस्पताल एजेंसी से केवल रजिस्ट्रेशन के लिए सर्टिफिकेट तो ले लिया जाता है उसके बाद अस्पताल लापरवाह हो जाता है. अपनी सुविधा को देखते हुए अपने आस-पास मेें ही कचरा का निस्तारण कर दिया जाता है.

अस्पतालों में इस्तेमाल की गई सुइयां, सिरिंज, खून से सने कपड़े, शरीर के अंग, दवाएं, रसायन और लैब के नमूने शामिल हैं. इसे सामान्य कचरे के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए. यह बीमारियों और प्रदूषण का कारण बन सकता है.

क्या कहते हैं सीएस

जिले में निजी अस्पतालों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है. उनके स्वास्थ्य सेवाओं के साथ कचरा प्रबंधन को लेकर वे कुछ नहीं कर सकते हैं. रजिस्ट्रेशन देने के समय अस्पताल संचालकों से एजेंसी द्वारा मेडिकल बेस्ट उठाव को लेकर निर्धारित सर्टिफिकेट प्राप्त किया जाता है. उसके बाद उनका कोई नियंत्रण नहीं है.

शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती, सिविल सर्जन, बक्सर

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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