Buxar News : दुष्कर्म के प्रयास में पिता को सात वर्षों का कठोर कारावास

Updated at : 24 Feb 2025 10:33 PM (IST)
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Buxar News : दुष्कर्म के प्रयास में पिता को सात वर्षों का कठोर कारावास

जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश- 6 सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अमित कुमार शर्मा की अदालत ने पॉक्सो कांड में कलियुगी पिता धरविंदर नाथ पासवान को सात वर्षों के कारावास की सजा सुनायी, साथ ही अर्थदंड भी लगाया.

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बक्सर कोर्ट. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश- 6 सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अमित कुमार शर्मा की अदालत ने महिला थाना कांड संख्या 31/ 2023 एवं पॉक्सो कांड संख्या 80 /2023 में कलियुगी पिता धरविंदर नाथ पासवान को सात वर्षों के कारावास की सजा सुनायी. न्यायालय ने अभियुक्त पर दो लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है जिसे नहीं देने पर एक वर्ष नौ माह अतिरिक्त जेल में बिताने होंगे. कोर्ट ने पीड़ित बच्ची को विक्टिम कंपनसेशन के तहत सरकार को भी सात लाख देने का आदेश दिया है, साथ ही अपने उक्त महत्वपूर्ण फैसले में पीड़िता के पुनर्वास की लिए भी जिक्र किया है. बताते चलें कि विगत बुधवार को न्यायालय ने पेशे से अधिवक्ता के रूप में कार्य करने वाले धरविंदर पासवान को अपनी ही बेटी के साथ दुष्कर्म के प्रयास में दोषी करार दिया था तथा सजा के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रखा था जिसे सोमवार को सुनाया गया. फैसले के समय न्यायालय में खचाखच भीड़ थी, जहां दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं द्वारा अंतिम रूप से बहस की गयी. सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए विशेष लोक अभियोजक सुरेश कुमार सिंह ने कहा कि ऐसा अपराध न सिर्फ कानूनी रूप से दंडनीय है बल्कि समाज के चेहरे पर भी एक गंदा निशान के रूप में देखा जायेगा. ऐसे में अभियुक्त को अधिकतम सजा सुनायी जाये. वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने न्यायालय से निवेदन किया कि अभियुक्त पेशे से अधिवक्ता है. इसलिए उसे क्षमा करते हुए कम से कम सजा दी जाये. दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा ने न्याय को सर्वोपरि बताते हुए उक्त फैसला सुना दिया. बताते चलें अभियुक्त की लगभग 12 वर्षीय पुत्री ने पुलिस को बताया था कि 20 जून, 2023 की रात 8:15 बजे वह अपने कमरे में लेटी हुई थी कि उसके पिता ने उसे पकड़ लिया तथा लैंगिक हमला करते हुए दुष्कर्म का प्रयास करने लगा, जिसके बाद वह जोर-जोर से रोने और चिल्लाने लगी. आवाज सुनकर जब उसकी मां आयी तो अभियुक्त ने उस पर भी हमला कर दिया जिसमें वह घायल हो गयी. उक्त मामले की प्राथमिकी पीड़िता ने थाने में अपने पिता के खिलाफ दर्ज दर्ज करायी थी. घटना की तिथि से ही अभियुक्त सेंट्रल जेल में काराधीन था तथा सोमवार को उसे सजा सुनायी गयी. न्यायालय ने पॉक्सो की धारा 42 के आलोक में भारतीय दंड विधान की धारा 354 बी के अंतर्गत अभियुक्त को सात वर्षों के कारावास के साथ-साथ दो लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनायी. अर्थदंड नहीं देने की स्थिति में अभियुक्त को एक वर्ष नौ माह अतिरिक्त जेल में बिताने होंगे.

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