बक्सर से डुमरांव पहुंची पर्यावरण संरक्षण पदयात्रा, अंगदान-देहदान और हरियाली का दिया संदेश
डुमरांव में पर्यावरण संरक्षण पदयात्रा का भव्य स्वागत हुआ। शहीदों को नमन कर अंगदान, देहदान और पौधरोपण के जरिए प्रकृति को बचाने का संदेश दिया गया।
Buxar News : बक्सर से डुमरांव तक निकली पर्यावरण संरक्षण बचाओ पदयात्रा के दूसरे दिन सोमवार को डुमरांव पहुंची. दधीचि देहदान समिति, आशा पर्यावरण सुरक्षा बिहार, शिका फाउंडेशन ट्रस्ट, भारत ज्ञान विज्ञान समिति एवं पीपल-नीम-तुलसी अभियान, पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पदयात्रा का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया. डुमरांव पहुंचने पर पदयात्रियों ने सबसे पहले वर्ष 1942 के अमर स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.
विद्यालय में पर्यावरण और अंगदान पर हुई विचार गोष्ठी
इसके बाद महारानी उषारानी प्लस टू उच्च विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण, अंगदान और देहदान विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई. कार्यक्रम का संचालन आशा पर्यावरण सुरक्षा के राज्य संयोजक विपिन कुमार ने किया. इस अवसर पर पदयात्रा में शामिल सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.
समाज में जागरूकता फैलाने का उद्देश्य
वक्ताओं ने कहा कि पदयात्रा का उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना नहीं, बल्कि समाज में अंगदान और देहदान के प्रति भी जागरूकता बढ़ाना है. उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों पौधे लगाए गए हैं. साथ ही घोषणा की गई कि जल्द ही बक्सर से पटना तक पदयात्रा का अगला चरण आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी.
सावन में पेड़-पौधों को जल देने की अपील
पूर्व चेयरमैन मीना सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर जीवन का अधिकार है और अंगदान-देहदान से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है. पर्यावरण प्रहरी डॉ. धर्मेंद्र ने गिरते भूजल स्तर और बदलती जलवायु पर चिंता जताते हुए लोगों से सावन के पावन महीने में भगवान शिव के साथ-साथ पेड़-पौधों को भी जल अर्पित कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की.
कठपुतली कला के माध्यम से दिया अंगदान का संदेश
कठपुतली कलाकार सुनील ने अपनी प्रस्तुति और गीतों के जरिए अंगदान और नेत्रदान के महत्व को सरल ढंग से समझाया. उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद को अंगदान या नेत्रदान कर उसके जीवन में नई रोशनी लाई जा सकती है. कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और मानव सेवा का संदेश प्रमुखता से दिया गया.
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