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मलई बराज परियोजना से पानी नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी

Updated at : 16 Oct 2025 10:38 PM (IST)
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मलई बराज परियोजना से पानी नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी

बिहार विधानसभा चुनाव में जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र के किसान मलई बराज से पानी दिलाने के लिए मांग करेंगे.

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नावानगर/केसठ. बिहार विधानसभा चुनाव में जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र के किसान मलई बराज से पानी दिलाने के लिए मांग करेंगे. लंबे समय से अधर में लटकी मलई बराज परियोजना का काम नब्बे प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है. इस परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र के दर्जनों गांवों के खेतों में फसल लहलहायेगी. मलई बराज परियोजना अब तक अधर में ही लटकी है. लगभग 58.25 करोड़ की लागत से काम शुरू होने के बाद डिजाइन में दोष के कारण एक बार पूरा बना-बनाया पाया धंस गया था. इसके वजह से विगत तीन-चार वर्षों तक काम लटका रहा. मलई बराज परियोजना का काम नये सिरे से शुरू किया गया. निर्माण कंपनी पुराने पिलर और गलत निर्माण को तोड़ कर दुबारा नए सिरे से उसे तैयार किया है. दूसरे चरण की स्वीकृत राशि भी 58.25 करोड़ ही रखी गयी. क्षेत्र में फसल के सिंचाई की जरूरत को देखते हुए 1986 में राज्य की तत्कालीन सरकार ने सिंचाई प्रमंडल नावानगर की स्थापना की थी. तब लाखों रुपये की लागत से मलई बराज का निर्माण कार्य शुरू भी कराया गया था. परंतु राजनीतिक एवं सामाजिक कारणों से परियोजना का काम बंद हो गया था. इसके बाद 2012 में मुख्यमंत्री की पहल पर दुबारा यह काम शुरू हुआ. मलई बराज के बनने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों को फायदा होगा. नावानगर प्रखंड के रूपसागर गांव के पास बनने वाले इस बराज से बक्सर, रोहतास व भोजपुर के हजारों एकड़ भूमि की प्यास बुझाने की योजना है. कैमूर पहाड़ के मंजर कुंड झील से निकलने वाली कांव नदी के पानी को बराज के माध्यम से डुमरांव रजवाहा को 110 व भोजपुर राजवाहा को 90 क्यूसेक पानी देने की योजना है. इससे पानी मिलने से बक्सर, भोजपुर व रोहतास जिलों के किसानों को सूखे की समस्या से निजात मिल जायेगी. खेतों में फसल लहलहा उठेंगी. मलई बराज परियोजना को चालू कराने को लेकर विगत कई बार क्षेत्र के किसानों ने धरना प्रदर्शन, आंदोलन व पैदल मार्च किया, लेकिन किसानों के मेहनत का परिणाम नए साल में मिलने वाला है. किसान सुनील कुमार सिंह उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि यदि मलई बराज योजना चालू हो जाता है, तो यह क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगा. वहीं सूखे की समस्या दूर हो जायेगी. क्षेत्र के सैकड़ों एकड़ खेतों की सिंचाई की सुविधा मिलेगी. वहीं कई सांसद व विधायक चुने गये. परंतु मलई बराज चालू कराने को लेकर किसी ने पहल नहीं किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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