पति के अवैध संबंध के कारण विवाहिता की हुई मौत, सीडीआर से हुआ खुलासा

नया भोजपुर गांव में मंगलवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद मोबाइल फोन खरीदने की जिद्द में हुई चार मौतों में कई अहम खुलासे हुए हैं.
डुमरांव. नया भोजपुर गांव में मंगलवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद मोबाइल फोन खरीदने की जिद्द में हुई चार मौतों में कई अहम खुलासे हुए हैं. पति के अवैध संबंध की भी पुष्टि हुई है. उसके बाद पुलिस ने मृतका सविता देवी के पति सुनील सिंह को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है. मालूम हो कि मंगलवार की दोपहर सविता देवी ने अपने घर में जहर खाया तथा अपने तीनों बच्चों को भी पिला दिया. रात होते-होते उसकी और सभी बच्चों की मौत हो चुकी थी. पति सुनील के बयान से शुरुआत हुई जांच ने धीरे-धीरे कई ऐसे राज खोले, जिन्होंने इस मौत को केवल मोबाइल की जिद्द ही नहीं मामला यह अवैध संबंध का भी है. प्रारंभिक जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि मृतका के पति सुनील का अवैध संबंध भी था जिस कारण पूर्व से पति और पत्नी में अक्सर विवाद होते रहता था. सीडीआर ने खोला राज, मिले साक्ष्य : घटना के बाद पुलिस को दिए गए बयान में सुनील ने बताया था कि उसकी पत्नी दो मोबाइल फोन खरीदने की जिद्द कर रही थी. एक मोबाइल अपने पिता को और दूसरा अपनी बहन को देने के लिया. लेकिन वो आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए सुनील ने जब असमर्थता जताई, तो बात बढ़ती चली गयी और गुस्से में आकर पत्नी ने बच्चों के साथ जहर खा लिया. लेकिन पुलिस के सामने आयी कहानी इससे कहीं आगे की है. जांच में सुनील का मोबाइल सीडीआर खंगालते ही पुलिस को उस महिला के साथ उसके अवैध संबंधों के प्रमाण मिले, जिसकी पता सुनील के ससुराल वालों को भी थी. दोनों परिवारों के बीच पंचायत भी हुई थी, पंचायत के दौरान सुनील ने अपने अवैध संबंध खत्म करने के लिए बोला था. लेकिन सब कुछ वादा, वादा ही रह गया. विवाद बढ़ते गए, तनाव गहराता गया और सब्र का बांध टूटता चला गया. पिता के बयान पर दर्ज हुई प्राथमिकी : मृतका सविता के पिता ओमप्रकाश सिंह ने सुनील के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी. पुलिस का मानना है कि मोबाइल विवाद के साथ सुनील का अवैध संबंध भी सविता को अंदर ही अंदर तोड़ रहा था. यही कारण था कि पुलिस की जांच में आत्महत्या का कारण बताया जा रहा है. पुलिस ने प्राथमिक इलाज करने वाले पीएचसी के चिकित्सकों से भी आवश्यक पूछताछ की है. जहर खाने के बाद जब बच्चों की हालत बिगड़ने लगी, तब सुनील ही उन्हें लेकर स्थानीय पीएचसी पहुंचा. उस समय ओपीडी बंद होने में कुछ ही क्षण बचे थे. डॉक्टरों को उसने बताया कि बच्चों ने कुछ खा लिया है. प्राथमिक उपचार के बाद जब बच्चे सामान्य दिखे, तो उन्हें घर ले जाने की अनुमति दी गई. लेकिन पीएचसी के डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उस समय सविता को अस्पताल में नहीं लाया गया था. पुलिस की तत्परता से खुले राज : शाम होते-होते जब अचानक पत्नी और बच्चों की हालत दोबारा बिगड़ी तो सुनील उन्हें लेकर सदर अस्पताल भागा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. पहले सविता की मौत हुई, फिर एक-एक कर तीनों मासूम बच्चों की जाने चली गयी. एसडीपीओ पोल्तस कुमार के निर्देशन और थानाध्यक्ष चंदन कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने पहले दिन से ही हर बिंदु पर जांच शुरू कर दी. जहर खरीदने वाली दुकान, पीएचसी के डॉक्टरों के बयान, और सुनील के मोबाइल की कॉल डिटेल हर जानकारी पुलिस के लिए इस मामले को सुलझाने का एक हिस्सा बनती गई. एफएसएल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी बाकी हैं, लेकिन प्रारंभिक जांच में सुनील के अवैध संबंध और पारिवारिक विवाद की पुष्टि के साथ ही मृतका के पिता ओमप्रकाश सिंह द्वारा अपने दामाद के विरुद्ध पुलिस को दिए गए आवेदन के बाद बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया. विवाहित सुनील की तीसरी पत्नी थी और तीन बच्चे थे : सुनील की सविता से यह तीसरी शादी थी. पहली पत्नी से उसे दो बेटियां निशा और चिंता थीं, लेकिन बीमारी से उसकी पत्नी की मौत हो गयी. दूसरी पत्नी भी कुछ वर्षों बाद साथ छोड़ दी. तीसरी शादी सविता से हुई, जिससे उसे ज्योति, विकास और आकाश तीन बच्चे हुए. कुछ दिन पहले सविता सुनील के साथ बैंक गई थी, जहां से दोनों ने चावल में डालने वाला कीटनाशक खरीदा था. शायद उसी ज़हर ने उसकी और तीनों बच्चों की जिंदगी खत्म कर दिया और पूरा परिवार ही खत्म हो गया
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