​नए परिसीमन से बक्सर में राजनीति हलचल तेज: पंचायत चुनाव को लेकर दिग्गजों की सांसें अटकीं, युवाओं के हौसले बुलंद​

Updated:
विज्ञापन
​नए परिसीमन से हिला बक्सर का ग्रामीण गणित: दिग्गजों की सांसें अटकीं, युवाओं के हौसले बुलंद​

बक्सर में नए परिसीमन से ग्रामीण राजनीति में आया भूचाल। दिग्गजों की चिंता बढ़ी, युवाओं में उत्साह। जानिए क्या है पूरा चुनावी गणित और इसका असर।

विज्ञापन

Panchayat Elections : बक्सर जिले में त्रिस्तरीय पंचायतों के नए परिसीमन के फैसले ने ग्रामीण राजनीति में हलचल तेज कर दी है. राज्य निर्वाचन आयोग और बिहार सरकार के इस कदम के बाद गांव-गांव में चुनावी चर्चा समय से पहले ही गरमा गई है. चौपालों से लेकर चाय दुकानों तक अब सिर्फ एक ही चर्चा है, नया नक्शा क्या कहता है और किसका समीकरण बिगड़ेगा या बनेगा.

11 प्रखंडों में राजनीतिक हलचल

जिले के बक्सर सदर, इटाढ़ी, राजपुर, चौसा, सिमरी, ब्रह्मपुर, डुमरांव, नावानगर, केसठ और चौगांई जैसे सभी 11 प्रखंडों में राजनीतिक हलचल साफ देखी जा रही है. संभावित प्रत्याशी और मौजूदा जनप्रतिनिधि मतदाता सूची, राजस्व नक्शा और आबादी के आंकड़ों के साथ जोड़-घटाव में लगे हैं.

दियारा इलाके में जगी नई उम्मीद

गंगा किनारे बसे दियारा क्षेत्रों जैसे सिमरी, ब्रह्मपुर और बक्सर सदर में परिसीमन की खबर से लोगों में उम्मीद जगी है. यहां के कई टोले अब तक बड़ी पंचायतों में शामिल होने के कारण विकास से दूर रहे हैं. पंचायत भवन, राशन दुकान या स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने के लिए लोगों को 6 से 8 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता था.

नई व्यवस्था में करीब 7 हजार की आबादी पर पंचायत बनने की संभावना से इन इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है. खासकर बाढ़ के समय अलग-थलग पड़ जाने वाले गांवों को प्रशासनिक सुविधा मिलने की उम्मीद बढ़ी है.

पंचायत मुख्यालय को लेकर शुरू हुई खींचतान

हालांकि दियारा क्षेत्रों में अब एक नई बहस भी शुरू हो गई है. अगर नए सिरे से पंचायत बनती है तो उसका नाम क्या होगा और पंचायत भवन कहां बनेगा. अलग-अलग टोले अपने-अपने गांव में मुख्यालय बनाने की मांग कर रहे हैं, जिससे अंदरूनी खींचतान भी बढ़ गई है.

राजपुर और डुमरांव में बढ़ा सियासी तनाव

राजपुर, डुमरांव और नावानगर जैसे इलाकों में परिसीमन की आहट से मौजूदा जनप्रतिनिधियों की चिंता बढ़ गई है. पिछले चुनाव में जिन इलाकों में उन्होंने ज्यादा काम कर अपना वोट बैंक मजबूत किया था, वही क्षेत्र अब दूसरी पंचायत या वार्ड में शामिल होने की संभावना में हैं.

इससे उनके पूरे चुनावी समीकरण पर असर पड़ सकता है. कई नेताओं की रणनीति अचानक बदलती नजर आ रही है.

आरक्षण का नया गणित भी बना चुनौती

परिसीमन के साथ ही आरक्षण का नया रोस्टर भी लागू होगा. कई सीटें सामान्य से बदलकर पिछड़ा वर्ग या महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो सकती हैं. इससे कई स्थापित नेताओं के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल हो सकता है.

चौसा और शहरी विस्तार वाले इलाकों में असमंजस

चौसा और बक्सर नगर परिषद के आसपास के गांवों में स्थिति और जटिल हो गई है. कुछ ग्रामीण क्षेत्र पहले ही शहरी निकाय में शामिल हो चुके हैं, जिससे बची हुई पंचायतों का स्वरूप असंतुलित हो गया है.

चौसा थर्मल पावर प्लांट के आसपास के गांवों में लोगों की चिंता यह है कि तेजी से बढ़ी आबादी को अगर पुराने आंकड़ों के आधार पर नजरअंदाज किया गया, तो उन्हें विकास योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा.

चौपालों में बदली चर्चा, युवाओं में बढ़ा उत्साह

गांवों की चौपालों पर अब खेती और मौसम की जगह चुनावी गणित की चर्चा हो रही है. पुराने नेता जहां नए नक्शे से परेशान हैं, वहीं युवाओं में उत्साह देखा जा रहा है.

नई पंचायतों के गठन से नए पद सृजित होंगे, जिससे पढ़े-लिखे युवाओं और नए चेहरों को राजनीति में आने का मौका मिलेगा. अब तक जो लोग दिग्गजों के दबदबे के कारण पीछे थे, उन्हें आगे बढ़ने का अवसर नजर आ रहा है.


विज्ञापन
Santosh Kant

लेखक के बारे में

By Santosh Kant

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन