बक्सर में बारिश की बेरुखी से धान की रोपनी पर संकट, ट्यूबवेल के सहारे खेत बचा रहे किसान

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परेशान किसान | Prabhat Khabar Network

परेशान किसान

बक्सर में बारिश न होने से किसान परेशान हैं। ट्यूबवेल और बिजली के सहारे धान की रोपनी की जा रही है। जानिए जिले में धान की खेती का ताजा हाल और सिंचाई की स्थिति।

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Burxar Farmer : बक्सर जिले में धान की रोपनी का समय तेजी से बीतता जा रहा है, लेकिन बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. आसमान से बादल गायब हैं और तेज धूप के साथ भीषण गर्मी पड़ रही है. ऐसे हालात में खेतों में नमी टिक नहीं पा रही है, जिससे रोपनी का काम प्रभावित हो रहा है. मजबूरी में किसान पाताल से पानी निकालकर यानी ट्यूबवेल के सहारे किसी तरह धान की रोपनी पूरी करने में जुटे हुए हैं.

दिन-रात खेतों में पानी पहुंचाने के लिए किसान लगातार मोटर और ट्यूबवेल चला रहे हैं. हालांकि, उनकी मेहनत पर मौसम पानी फेरता नजर आ रहा है. दिनभर की कड़ी धूप अगले ही दिन खेतों का पानी सुखा देती है, जिससे दोबारा सिंचाई करनी पड़ रही है. इसके बावजूद किसान हिम्मत नहीं हार रहे और किसी तरह रोपनी का अंतिम चरण पूरा करने में लगे हैं.

212 नलकूप खराब, बढ़ी सिंचाई की दिक्कत

जिले में सिंचाई व्यवस्था भी किसानों का साथ नहीं दे रही है. सिंचाई विभाग के 212 नलकूप खराब पड़े हैं, जिससे पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. नलकूप बंद रहने से किसानों की निर्भरता पूरी तरह निजी ट्यूबवेल पर बढ़ गई है.

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि खराब नलकूपों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है और जल्द ही इन्हें चालू करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन जब तक ये नलकूप चालू नहीं होते, तब तक किसानों की परेशानी कम होती नहीं दिख रही.

80 प्रतिशत क्षेत्र में पूरी हुई रोपनी

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल जिले में 97,782.50 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य तय किया गया है. अब तक करीब 78,000 हेक्टेयर यानी लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र में रोपनी पूरी हो चुकी है. बाकी बचे क्षेत्रों में भी किसान तेजी से काम कर रहे हैं, ताकि समय रहते रोपनी खत्म हो सके.

हालांकि, मौसम का साथ नहीं मिलने से यह काम काफी चुनौतीपूर्ण बन गया है. जिन इलाकों में अभी रोपनी बाकी है, वहां किसानों की चिंता और ज्यादा बढ़ गई है.

क्या कहते हैं किसान

किसान अजय राय ने बताया कि इस बार मानसून पूरी तरह से धोखा दे रहा है. न तो समय पर बारिश हो रही है और न ही नहरों से पर्याप्त पानी मिल पा रहा है. ऐसे में खेती पूरी तरह ट्यूबवेल और भूजल पर निर्भर हो गई है.

उन्होंने कहा कि सरकार के निर्देश पर बिजली विभाग कृषि फीडरों को दिन-रात बिजली दे रहा है, जिससे ट्यूबवेल चलाने में सहूलियत मिल रही है. लेकिन सिर्फ ट्यूबवेल के भरोसे पूरी खेती करना आसान नहीं है.

भूजल दोहन भी बना चिंता का कारण

लगातार ट्यूबवेल चलाने से भूजल स्तर गिरने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. किसान मानते हैं कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में पानी की और भी बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है.

किसानों का कहना है कि अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पर इसका सीधा असर पड़ेगा. उत्पादन घट सकता है और मेहनत बेकार जाने का डर भी बना हुआ है.

आसमान की ओर टिकी उम्मीदें

फिलहाल जिले के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही बारिश होगी और उनकी मेहनत रंग लाएगी. अच्छी बारिश ही इस खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगा सकती है और किसानों को राहत दे सकती है.


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Mritunjay Singh

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By Mritunjay Singh

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