बक्सर: बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर में सावन की सोमवारी पर भक्तों की भीड़, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा ब्रह्मपुर धाम
श्रद्धालुओं की लंबी लाइन
सावन की सोमवारी पर बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर, ब्रह्मपुर में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा. दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय कर दिया. विशेष रुद्राभिषेक और महाआरती का भी आयोजन किया गया.
Buxar Baba Bhramreshwar Nath Temple: ऐतिहासिक, पौराणिक और मोक्षदायिनी परंपरा के प्रतीक भगवान शिव के धाम बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर (ब्रह्मपुर) में सावन मास की सोमवारी पर आस्था का महासागर उमड़ पड़ा. अहले सुबह से ही मंदिर परिसर और इसके आसपास के इलाकों में शिव भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बाबा को जल, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित किया. पूरा क्षेत्र ''हर-हर महादेव'' और ''बम-बम भोले'' के जयकारों से गूंज उठा, जिससे संपूर्ण वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया.
अहले सुबह से शुरू हुआ जलाभिषेक
सावन मास की सोमवारी के पावन अवसर पर ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं ने जयकारे के साथ जलाभिषेक शुरू कर दिया. मुख्य मंदिर के गर्भगृह से लेकर बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं. महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों में बाबा के दर्शन और जलाभिषेक को लेकर गजब का उत्साह देखा गया. कई श्रद्धालु रविवार की शाम से ही ब्रह्मपुर पहुंच चुके थे, ताकि वे सुबह की पहली पूजा और जलाभिषेक में शामिल हो सकें.

अंतरराज्यीय स्तर पर पहुंचे कांवरिए और श्रद्धालु
बक्सर जिले के ब्रह्मपुर स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली है. इस सोमवारी पर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के बलिया, गाजीपुर, मऊ और वाराणसी, झारखंड तथा बिहार के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में कांवरिए और शिवभक्त पहुंचे. भक्तों ने गंगा और अन्य पवित्र नदियों से जल भरकर लंबी पदयात्रा के बाद बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ का अभिषेक किया. बैरिकेडिंग की व्यवस्था के जरिए भक्तों को सुगमता से कतार में आगे बढ़ाया जा रहा था, ताकि किसी भी प्रकार की भगदड़ या असुविधा की स्थिति न बने.
विशेष अनुष्ठान और रुद्राभिषेक का महत्व
सोमवारी के इस पावन दिन पर मंदिर के पुजारियों द्वारा विशेष रुद्राभिषेक, महाआरती और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन अनुष्ठान संपन्न कराया गया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव की आराधना करने और बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ को जल चढ़ाने से साधक को अष्टधातु लिंग के दर्शन का पुण्य फल प्राप्त होता है और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. संध्या बेला में होने वाली भव्य महाआरती को लेकर भी श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया. इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में डटे हुए हैं.
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