आस्था व विश्वास का केंद्र है प्राचीन मां काली मंदिर
Updated at : 02 Apr 2017 2:04 AM (IST)
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नवरात्र में मन्नत पूरी करने के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु डुमरांव : डुमरांव के ह्रदय स्थली राजगढ़ चौक स्थित काली मंदिर 350 वर्ष पुराना है, जहां भक्त आस्था व विश्वास के साथ अपने बिगड़े काम को बनाने के लिए पहुंचते हैं. महाकाली के दरबार में नवरात्र के समय अपार भीड़ होती है. कभी एक छोटे […]
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नवरात्र में मन्नत पूरी करने के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु
डुमरांव : डुमरांव के ह्रदय स्थली राजगढ़ चौक स्थित काली मंदिर 350 वर्ष पुराना है, जहां भक्त आस्था व विश्वास के साथ अपने बिगड़े काम को बनाने के लिए पहुंचते हैं.
महाकाली के दरबार में नवरात्र के समय अपार भीड़ होती है. कभी एक छोटे से गर्भगृह में स्थापित मां काली का मंदिर आज लंबे-चौडे भू-भाग में फैला हुआ है. 120 फुट से ऊपर लंबे गुबंदवाले इस मंदिर की चर्चा जिला ही नहीं बल्कि शाहाबाद में है. राजगढ़ चौक, छठिया पोखरा और ठठेरी बाजार जानेवाले मार्ग के मुख्य तीन मुहाने पर यह मंदिर मौजूद हैं. रात्रि में मंदिर में लगी लाइटों से पूरा क्षेत्र जगमग होने लगता है. मंदिर के पुजारी सिद्धेश्वर मिश्रा कहते हैं कि माता की स्थापना 350 साल पूर्व हुई है. कहते हैं कि मांगी गयी हर मन्नत यहां आने से अवश्य पूरी होती है. मंदिर निर्माण में स्थानीय व्यवसायी पन्नालाल जायसवाल की सराहनीय भूमिका रही है.
माता के दरबार में वर्ष 2009 में आदि शक्ति मां दुर्गा, विंध्यवासिनी मां सरस्वती, गणपति व रामभक्त हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गयीं. महिलाओं के साथ युवतियां भी मां के दर्शन में पहुंचती हैं. महाआरती के समय नगाड़ा व घंटी और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो जाता है.
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