शिथिलता. राज्य स्वास्थ्य समिति की टीम ने की जांच , स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि के बजाय लगातार आ रही है गिरावट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Apr 2016 4:56 AM (IST)
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सदर अस्पताल को लग गयी ‘असुविधा’ की बीमारी 100 बेडोंवाले सदर अस्पताल में आज बुनियादी सुविधाएं भी लोगों को मयस्सर नहीं हो पाती है.अस्पताल में जहां मुख्य रूप से तीन जनरल वार्ड, आपातकाल वार्ड एवं लेबर वार्ड संचालित हैं. जनरल वार्ड के तहत जनरल ओपीडी, इनडोर चिकित्सा, डी एडिक्शन, एसएनसीयू एवं अन्य सेवाएं देनी हैं, […]
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सदर अस्पताल को लग गयी ‘असुविधा’ की बीमारी
100 बेडोंवाले सदर अस्पताल में आज बुनियादी सुविधाएं भी लोगों को मयस्सर नहीं हो पाती है.अस्पताल में जहां मुख्य रूप से तीन जनरल वार्ड, आपातकाल वार्ड एवं लेबर वार्ड संचालित हैं. जनरल वार्ड के तहत जनरल ओपीडी, इनडोर चिकित्सा, डी एडिक्शन, एसएनसीयू एवं अन्य सेवाएं देनी हैं, लेकिन मरीजों की इनकी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं़
बक्सर : स्वास्थ्य के क्षेत्र में एनएबीएस की मानक सुविधा के दहलीज पर खड़ा बक्सर सदर अस्पताल प्रबंधन को पहले से प्राप्त आइएसओ मानक भी अब छीनने का भय सताने लगा है. कभी स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के मामले में अग्रणी अस्पताल आज स्वयं ही अपना इलाज की बाट जोहने लगा है. सदर अस्पताल में सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाओं का अभाव स्पष्ट झलकना शुरू हो गया है. ऑपरेशन के नाम पर अभी केवल सिजेरियन ही होता है.
दिसंबर माह में राज्य स्वास्थ्य समिति की आयी टीम ने सदर अस्पताल में लगभग 33 समस्याएं प्रबंधन को दूर करने को कहा था़ बजाय समस्या कम होने के अप्रैल में जब दोबारा टीम पहुंची, तो लगभग साढ़े चार दर्जन समस्याओं का लिस्ट बना कर अस्पताल प्रबंधन को थमा दिया़ समस्याएं कम व दूर होने की बजाय बढ़ते ही जा रही है. इससे अप्रैल माह में आनेवाली आइएसओ की जांच से सदर अस्पताल के आइएसओ मानक का छीनने का खतरा उत्पन्न हो गया है.
क्या है आइएसओ
बेहतर सर्विस प्रदान करनेवाले संस्थानों को आइएसओ मानक प्रदान किया जाता है. सदर अस्पताल बक्सर को 2012 के जून माह में बेहतर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आइएसओ का मान्यता प्रदान किया गया था़
मान्यता मिलने पर अलग से मिलती है राशि : आइएसओ मानक प्रति तीन साल पर जांचोपरांत मानक का विस्तार सेवा आधार पर किया जाता है. इसके मिलने के बाद विभाग द्वारा बेहतर व गुणवत्ता पूर्ण सुविधा बनाये रखने के लिए अलग से राशि दी जाती है.
इस तरह मिलता है मान्यता : बक्सर सदर अस्पताल को आइएसओ 2001-2008 का मानक अस्पताल के
डोकुमेंनटेशन, लीगल रिक्वायरमेंट व प्रोवाइक सर्विस की गुणवत्ता को देखा जाता है.
नहीं मिलतीं ये सुविधाएं
नहीं है अल्ट्रासाउंड की सेवा : विगत तीन साल से मानक के अनुसार अल्ट्रासाउंड करनेवाले चिकित्सक की उपलब्धता नहीं होने से सेवा बंद है.
इसीजी की सेवा बंद : सदर अस्पताल में पहुंचनेवाले मरीजों को इसीजी की सेवा नहीं मिलती है. यह सेवा ओपीडी के तहत संचालित है. इसीजी मशीन पर धूल जमा है.
चिकित्सकों की कमी : सदर अस्पताल में चिकित्सकों की काफी कमी है, जो चिकित्सक उपलब्ध हैं एक सर्जन को छोड़ शेष सभी एमबीबीएस चिकित्सक ही हैं. अस्पताल में 19 चिकित्सक इन दिनों कार्यरत हैं.
ए ग्रेड नर्स की है कमी :सदर अस्पताल में 50 ए ग्रेड नर्स की रिक्ति है, जिसके विरुद्ध महज 26 ही ए ग्रेड नर्स सदर अस्पताल में मौजूद हैं. जिससे काम में काफी परेशानी होती है.
फिलहाल ये सुविधाएं
नया खुला है डायलिसिस केंद्र : सदर अस्पताल में न्यूनतम सरकारी दर पर डायलिसिस सेवा मरीजों को दी जा रही है़ मरीज बहुत कम कीमत पर डायलिसिस की सुविधा पा रहे हैं.
नया खुला है डी एडीक्शन सेंटर : पूर्ण शराबबंदी के बाद शराब के लती लोगों की स्वास्थ्य सुविधा के लिए सरकार द्वारा डी एडिक्शन सेंटर खोला गया है.
शिशु गहन चिकित्सा इकाई में चल रहा जैसे-तैसे : अपने उद्घाटन के बाद कुछ समय तक सही ढंग से नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई संचालित हुई. इसके बाद रूग्ण स्थित में आज भी संचालित है. 13 ए ग्रेड नर्स की बजाय कुछ ए ग्रेड नर्स के सहारे चल रहा है. साथ ही सदर अस्पताल व एसएनसीयू में एक भी शिशु चिकित्सक नहीं हैं.
ओटी की है व्यवस्था : सदर अस्पताल में ओटी की व्यवस्था है, पर सर्जन के रूप में एक ही विशेषज्ञ चिकित्सक हैं. सर्जरी महज सिजेरियन ही होता है. इसके अलावा सर्जरी की व्यवस्था तक नहीं है. सिजेरियन सर्जरी की आपात स्थिति में सर्जरी निजी क्लिनिक में जाकर कराना पड़ता है.
राज्य स्वास्थ्य समिति की टीम ने की जांच
राज्य स्वास्थ्य समिति की टीम द्वारा 31 दिसंबर के जांच में 33 कमियों की दूर करने का निर्देश सदर अस्पताल प्रबंधन को दिया. वे कमियां दूर होने की बजाय अप्रैल में हुई विजिट में बढ़ कर चार दर्जन की आंकड़े को पार कर गयीं हैं. सदर अस्पताल की कमियां निम्नवत हैं, जिसे दूर करने की समिति ने निर्देश दिया है.
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