मच्छरों के प्रकोप से संक्रमण का खतरा

Published at :28 Feb 2016 3:46 AM (IST)
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मच्छरों के प्रकोप से संक्रमण का खतरा

नगर पर्षद नहीं दे रहा ध्यान, लोगों का सोना हुआ हराम मच्छरों के कारण शहरवासियों परेशान नहीं हो रहा दवाओं का छिड़काव खत्म हो गयी नगर पर्षद के पास दवा दवा की आपूर्ति के लिए की गयी मांग बक्सर : मौसम के बदलते मिजाज और फरवरी में हल्की ठंड की जगह शुरू हुई गरमी से […]

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नगर पर्षद नहीं दे रहा ध्यान, लोगों का सोना हुआ हराम

मच्छरों के कारण शहरवासियों परेशान
नहीं हो रहा दवाओं का छिड़काव
खत्म हो गयी नगर पर्षद के पास दवा
दवा की आपूर्ति के लिए की गयी मांग
बक्सर : मौसम के बदलते मिजाज और फरवरी में हल्की ठंड की जगह शुरू हुई गरमी से मच्छरों का प्रकोप पूरे शहर में बढ़ गया है. इन मच्छरों से आम जनजीवन परेशान हो गया है. लोग मच्छरों से होनेवाले संक्रमण को लेकर भयभीत हैं. अस्पतालों में भी मौसम में बदलाव को लेकर बीमार लोगों की संख्या काफी बढ़ गयी है.
नगर पर्षद द्वारा मच्छरों से बचाव के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है. अब तक डीडीटी का भी छिड़काव नहीं किया जा सका है. नगर पर्षद के पास दवा के छिड़काव के लिए तीन मशीनें हैं, उसमें एक मशीन कई महीनों से तकनीकी खराबी के कारण बेकार पड़ी है. साथ ही छिड़काव के लिए दवा भी उपलब्ध नहीं है.
नहीं काम कर रहे मच्छरों से बचाव के उपकरण : घरों में लगाये जाने वाले मच्छरों से बचाव के क्वायल जलाने के बावजूद मच्छर थोड़ी देर के लिए भाग जाते हैं, मगर फिर वापस हमला कर देते हैं. मच्छरों के कारण लोगों की नींद हराम है. मच्छरदानी में नहीं सोने वाले लोगों को रात भर मच्छरों के कारण जागे रहना पड़ता है.
मच्छरदानी लगाये जाने के बाद भी थोड़ी सी चूक में मच्छर मच्छरदानी के अंदर ही प्रवेश कर जाते हैं. शहर में सफाई व्यवस्था के बाद भी आलम यह है कि हर इलाके में कमोवेश मच्छरों का भयानक प्रकोप हो गया है. शाम ढलते ही मच्छर लोगों को परेशान करने लगते हैं. मच्छरों की अधिकता के कारण फास्ट कार्ड भी काम नहीं कर रहा है. पिछले कई दिनों से मच्छरों की दवा का छिड़काव नगर परिषद द्वारा बंद है क्योंकि इसकी दवा ही खत्म हो गयी है.जब तक दवा नहीं आती छिड़काव तो किया जाना संभव नहीं है.
छिड़काव की तीन में से एक मशीन महीनों से खराब : नगर पर्षद के पास मच्छरों के छिड़काव की तीन मशीनें हैं, जिसमें दो मशीनें काम कर रही है. जबकि तीसरी बड़ी मशीन कई माह से खराब पड़ी है. उस मशीन का मरम्मतकर्ता इंजीनियर ही नहीं मिल रहा है जिसके कारण मशीन महीनों से खराब पड़ी है.
जानकारी के अनुसार उस मशीन का प्रेशर और नोजल दोनों खराब हो गया है. जिसके कारण उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है. दो छोटी मशीनों से छिड़काव का काम कराया जा रहा है. दवा के अभाव में ये मशीनें भी धुआं उगलना बंद कर चुकी है और दवाओं के लिए मुख्यालय में आपूर्ति के लिए पत्र भेजा गया है. दवाएं कब आयेगी इसका अता-पता नहीं है.
मशीनों के साथ दो साल पहले आयी थी दवा : जानकारी के अनुसार करीब दो साल पहले मच्छर मारने की दवा छिड़काव की मशीनें जिसमें दो छोटी और एक बड़ी मशीन आयी थी. इन मशीनों के साथ ही मच्छर मारने की दवा 100 लीटर साथ आयी थी. उसके बाद से मच्छर मारने की दवा की न तो आपूर्ति हुई और न ही दवा यहां से मांगी गयी. क्योंकि उसी 100 लीटर में काम चलाया जा रहा था.इस संबंध में सफाई की देखरेख करने वाले इशरत हुसैन कहते हैं
कि 5 लीटर में 300 ग्राम दवा और 75 लीटर की टंकी वाली बड़ी मशीनें 75 लीटर डीजल के साथ 1 लीटर दवा और सघन मच्छर वाले क्षेत्र में डेढ़ लीटर दवा मिलायी जाती है जिससे छिड़काव होता है. दवाओं की खपत तेल की अपेक्षा कम होती है.दवाओं की आपूर्ति के लिए विभाग को लिखा जा चुका है.दवा आते ही फिर छिड़काव शुरू किया जायेगा. वैसे छिड़काव में एक से दो लीटर प्रतिदिन खर्च हो जाता है अगर सभी क्षेत्रों को शामिल किया जाय.
इन क्षेत्रों में सर्वाधिक है प्रकोप
नगर परिषद के स्लम इलाकों में मच्छरों का सर्वाधिक प्रकोप है.खलासी मुहल्ला,सोहनीपट्टी, नयी बाजार, मठिया मुहल्ला, हरिजन बस्ती, चरित्रवन, मुसाफिरगंज, बाइपास, आइटीआइ क्षेत्र, धोबी घाट आदि इलाकों में मच्छरों का सर्वाधिक प्रकोप है.इसके अतिरिक्त अन्य शहरी क्षेत्रों में भी मच्छरों से लोग परेशान हैं.
कहते हैं नगर पर्षद के उपाध्यक्ष
नगर पर्षद के उपाध्यक्ष इफ्तेखार अहमद कहते हैं कि दवा खत्म हो गयी है और दवा आते ही फिर छिड़काव शुरू किया जायेगा. छिड़काव में दो कर्मचारियों को लगाया गया है जो नियमित काम करते रहते हैं. मच्छरों का प्रकोप शहर में बढ़ा है जिसके लिए दवाओं का नियमित छिड़काव किया जायेगा.
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