तटीय इलाके में नीलगायों के आतंक से किसान परेशान

Published at :11 Feb 2016 4:49 AM (IST)
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तटीय इलाके में नीलगायों के आतंक से किसान परेशान

बक्सर : बक्सर जिले के किसान वर्षों से नीलगाय तथा काले हिरण का दंश झेल रहे हैं. बक्सर जिले की बड़ी आबादी इनके आतंक से पीडि़त है. ये जानवर किसानों की फसल को बरबाद करते हैं, मगर वन विभाग के कार्रवाई के भय से किसान नीलगाय, घोड़परास व काले हिरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता. […]

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बक्सर : बक्सर जिले के किसान वर्षों से नीलगाय तथा काले हिरण का दंश झेल रहे हैं. बक्सर जिले की बड़ी आबादी इनके आतंक से पीडि़त है. ये जानवर किसानों की फसल को बरबाद करते हैं, मगर वन विभाग के कार्रवाई के भय से किसान नीलगाय, घोड़परास व काले हिरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता. कमोवेश बक्सर जिले के सभी प्रखंडों में इन पशुओं का आतंक है.

जिले के ब्रह्मपुर, सिमरी, बक्सर, चक्की में इन जानवरों की सर्वाधिक संख्या है. जबकि डुमरांव, चौसा, राजपुर, इटाढ़ी में इनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है. इन क्षेत्रों में फसल की बरबादी के बावजूद इनको अब तक कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.कालांतर में कैमूर और रोहतास के जंगलों से बक्सर जिले में भाग कर आये इन जंगली पशुओं ने अपना आशियाना बना लिया और धीरे-धीरे इनकी आबादी बढ़ती जा रही है.

धान, गेहूं, सब्जी, अरहर, मिर्चा समेत चना दाल एवं अन्य फसलों को यह जानवर पसंद से खाते हैं. अपने झुंडों में रहनेवाले इन पशुओं का ठिकाना अरहर, गेहूं और धान की फसलों के बीच होता है और उसमें ही छिप कर रहते हैं. सूर्योस्त के बाद इनका समूह बड़ी संख्या में निकलता है और फसलों को बरबाद कर जाता है.

सबसे ज्यादा आतंक बक्सर प्रखंड के जगदीशपुर, कुल्हडि़या, नदांव, बसौली समेत कई मैदानी इलाके इन जंगली पशुओं से प्रभावित हैं. इसके अतिरिक्त सिमरी, ब्रह्मपुर,चक्की व केसठ प्रखंड के साथ-साथ कुछ संख्या में डुमरांव प्रखंड में भी ये दिख जाते हैं. चौसा प्रखंड और राजपुर प्रखंड में इनकी संख्या कम है जिसके कारण इस क्षेत्र के किसान राहत महसूस करते हैं. क्योंकि वहां के किसानों को यह जानवर ज्यादा क्षति नहीं पहुंचाते.

क्या कहते हैं जिला वन क्षेत्र के पदाधिकारी
इस संबंध में जिले के वन क्षेत्र पदाधिकारी एस कुमार कहते हैं कि बक्सर जिले में काला हिरण, नीलगाय और घोड़परास बड़ी संख्या में दिखते हैं और उनसे फसलों की क्षति होती है.हाल ही में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के निर्देश पर आदेश जारी किया है, जिसमें नवंबर, 2016 तक इन जानवरों को मारने की इजाजत सरकार ने दे दी है.
फसल की बरबादी करने पर कोई भी किसान अपने निजी व लाइसेंसी हथियारों से इन जानवरों को मार सकता है और वन विभाग इस संबंध में जानवर को मारने पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी.उन्होंने बताया कि छह महीने पहले भी नीलगायों के आतंक से उन्हें मारने का निर्देश जारी किया गया था और सूचना मिलने पर जिलाधिकारी, अनुमंडलाधिकारी और वनों के क्षेत्र पदाधिकारी इन जानवरों को मारने की दिशा में प्रयास करेंगे.
क्या कहते हैं राज्य वन के अधिकारी
राज्य के अवर प्रधान मुख्य वन संरक्षक देवेंद्र कुमार शुक्ला ने बताया कि अब तक राज्य में नीलगाय, घोड़परास का कोई सर्वे नहीं हो पाया है, मगर रोज मिल रही किसानों की समस्याओं और शिकायतों के बाद राज्य स्तर पर न सिर्फ नीलगाय,घोड़परास को मारने की अनुमति किसानों को दी गयी है, बल्कि जिन स्थानों पर जंगली सुअर खेतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. उन स्थानों पर जंगली सुअर को भी मारने का निर्देश दे दिया गया है. उन्होंने बताया कि नालंदा, वैशाली समेत कई जिलों में किसानों और वन विभाग के अधिकारियों ने उनको मारने का काम किया है. बुधवार को पटना जिले के पंडारक में राजदेव गांव में 42 घोड़परासों को मारा गया है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा, जिससे किसानों को राहत मिल सके.
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