जो श्रीकृष्ण का कीर्तन करेगा, उसके घर काल कभी नहीं आयेगा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Aug 2019 6:20 AM (IST)
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बक्सर : रामेश्वरनाथ मंदिर सेवाश्रम न्यास समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ बुधवार को विशाल भंडारे के साथ संपन्न हो गया. इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर भागवत कथा सुनने एवं प्रसाद ग्रहण को लेकर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. अंतिम दिन भक्तों ने कथा का रसपान करने के साथ ही […]
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बक्सर : रामेश्वरनाथ मंदिर सेवाश्रम न्यास समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ बुधवार को विशाल भंडारे के साथ संपन्न हो गया. इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर भागवत कथा सुनने एवं प्रसाद ग्रहण को लेकर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. अंतिम दिन भक्तों ने कथा का रसपान करने के साथ ही प्रसाद भी ग्रहण किया.
कथा के दौरान कथावाचक राणाधीर ओझा ने कहा कि मनुष्य शरीर ज्ञान और भक्ति प्राप्त करने का साधन है और यह सभी फलों का मूल है. यह शरीर दैवयोग से मिला है और यह उत्तम नौका के समान है जो गुरु रूपी मांझी यानी केवट के द्वारा बढ़ रहा है.
फिर भी इस अमूल्य देह का सदुपयोग कर मनुष्य भवसागर पार करने का यत्न न करें तो यह मनुष्य आत्मघाती की श्रेणी में आता है. उन्होंने आगे कहा कि सत्संग की प्राप्ति ईश्वर की कृपा पर आधारित है, लेकिन कामी का संग त्याग करना मनुष्य के वश की बात है. परमात्मा का भजन केवल मन से करना चाहिए. भगवान श्रीकृष्ण धन और रतन की मांग नहीं करते.
मन ही मनुष्य को विषयों में फंसाता है और मन भी साकार होकर जीव को सताता है. विषयों का चिंतन प्रभु भक्ति में बाधक है. अगर ईश्वर स्मरण न भी हो पाये तो भी मनुष्य को सांसारिक विषयों के चिंतन में मन नहीं लगना चाहिए. कलियुग में भी जो श्रीकृष्ण का कीर्तन करेगा उसके घर कली कभी नहीं जायेगा. कीर्तन करने से मनुष्य सभी दोष और पापों से मुक्त होकर प्रभु को प्राप्त कर सकता है.
मृत्यु के समय परमेश्वर का ध्यान और नाम लेने से भी प्रभु जीव को अपने स्वरूप में समाहित कर देते हैं. जन्म, जरा और मृत्यु शरीर के धर्म है आत्मा के नहीं. इस दौरान मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण का छठीहार उत्सव भी मनाया गया. आचार्य ने सुदामा चरित्र के प्रसंग का भी चित्रण किया और ब्रज की होली का गायन कर अपने पूज्य गुरुदेव श्री मामा जी की याद को ताजा कर दिया. दर्शक भाव विभोर हो झूमने पर मजबूर हो गये.
इस मौके पर मंदिर के न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष श्रीकांत पाठक, सचिव रामस्वरूप अग्रवाल, कोषाध्यक्ष हरिशंकर गुप्ता के अलावे सत्यदेव प्रसाद, नंद गोपाल जायसवाल, नेतलाल वर्मा, कमलेश्वर तिवारी, बैकुंठ नाथ शर्मा, सियाराम मिश्र, विजय कुमार वर्मा, कामेश्वर पांडेय, पंकज कुमार, बिट्टू कुमार, मकरध्वज तिवारी, उत्तम कुमार, रतन गुप्ता समेत अन्य लोग शामिल रहे.
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