हत्या के मामले में तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास

Updated at : 18 May 2018 4:45 AM (IST)
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हत्या के मामले में तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास

देने होंगे छह लाख रुपये बतौर जुर्माना 24 वर्षों के बाद आया फैसला बक्सर कोर्ट : फास्ट ट्रैक द्वितीय न्यायालय के न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने हत्या के एक मामले में गुरुवार को तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. पिछले दिनों न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को सुनवाई में दोषी पाया था. सजा के […]

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देने होंगे छह लाख रुपये बतौर जुर्माना

24 वर्षों के बाद आया फैसला
बक्सर कोर्ट : फास्ट ट्रैक द्वितीय न्यायालय के न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने हत्या के एक मामले में गुरुवार को तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. पिछले दिनों न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को सुनवाई में दोषी पाया था. सजा के बिंदु पर गुरुवार को फैसला सुनाया गया. इसके पहले बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने न्यायालय से प्रार्थना की कि अभियुक्तों को कम-से-कम सजा दी जाये. जबकि अपर लोक अभियोजक त्रिलोकी मोहन ने न्यायालय से निवेदन करते हुए कहा कि उक्त हत्या जघन्य तरीके से की गयी है. ऐसे में अभियुक्तों को संबंधित धाराओं के अंतर्गत पूरी सजा दी जाये.
बताते चलें कि 28 अप्रैल 1994 को डुमरांव थाना के चिलहरी गांव के रहनेवाले ललन पांडेय को चाकू से गोद-गोद कर उनके तीन सगे भाइयों कृष्ण चंद्र पांडेय, रमेश पांडेय एवं धनंजय पांडेय ने हत्या कर डाली थी. साथ ही सूचक को बचाने गये उसके दोनों पुत्रों को भी चाकू से हमला कर घायल कर दिया था. मरने से पूर्व मृतक ने पुलिस को बयान देते हुए कहा था कि जब डुमरांव बोरिंग ऑफिस से घर लौट रहा था कि रास्ते में तीनों भाइयों ने उसे पकड़ लिया तथा चाकू से अंधाधुंध कई वार कर डाले.
हमले में सूचक बुरी तरह से जख्मी हो गया था, जिसका इलाज के क्रम में बाद में मौत हो गयी थी. अभियुक्तों ने हमला करने के बाद पीड़ित के घर में घुसकर उसकी पत्नी के गहने भी छीन लिए थे. रंजिश का कारण महज एक चापाकल को लगाने को लेकर था, जहां मृतक रास्ते में लगाये जा रहे चापाकल का विरोध कर रहा था. सुनवाई में दोनों पक्षों की ओर से कुल 10-10 गवाहों की गवाही को दर्ज की गयी. न्यायालय ने उपलब्ध सभी साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर तीनों अभियुक्तों को भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं प्रत्येक को दो-दो लाख रुपये का जुर्माना, भादवि की धारा 307 के तहत पांच वर्षों का कारावास एवं 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी.
जुर्माना नहीं देने पर अभियुक्तों को पांच वर्ष अतिरिक्त जेल में बिताने पड़ेंगे. न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की राशि में से 80 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को दे दी जाये. बहस में अपर लोक अभियोजक त्रिलोकी मोहन के साथ रामकृष्ण चौबे ने हिस्सा लिया.
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