फर्जीवाड़ा. शिक्षा विभाग ने 13 लोगों को ऐसे ही कर लिया बहाल
Updated at : 03 Oct 2017 4:54 AM (IST)
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निदेशक प्रशासन सह संयुक्त सचिव शिक्षा विभाग ने दिये जांच के आदेश जिला अनुकंपा समिति की जगह जिला शिक्षा स्थापना समिति ने लिया था नियुक्ति का निर्णय बक्सर : बक्सर में नियम कानून नाम की कोई चीज नहीं है. नियमों को ताक पर रख शिक्षा विभाग ने 13 लोगों को रेवड़ी की तरह नौकरियां बांट […]
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निदेशक प्रशासन सह संयुक्त सचिव शिक्षा विभाग ने दिये जांच के आदेश
जिला अनुकंपा समिति की जगह जिला शिक्षा स्थापना समिति ने लिया था नियुक्ति का निर्णय
बक्सर : बक्सर में नियम कानून नाम की कोई चीज नहीं है. नियमों को ताक पर रख शिक्षा विभाग ने 13 लोगों को रेवड़ी की तरह नौकरियां बांट दीं. इसका खुलासा निदेशक प्रशासन सह संयुक्त सचिव शिक्षा विभाग से जांच के आये आदेश के बाद हुआ है. जिलाधिकारी इस बहाली की अब जांच करेंगे. इसके लिए कमेटी भी गठित कर दी गयी है. सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि जिला अनुकंपा समिति की जगह जिला शिक्षा स्थापना समिति ने बिना तत्कालीन जिलाधिकारी की सहमति के ही यह निर्णय लेकर बहाली कर दी. उस वक्त से सभी लोग विद्यालय एवं कार्यालयों में कार्यरत हैं. अब तक इनके वेतन पर सरकार के करोड़ों रुपये खर्च भी हो चुके हैं.
इस मामले को लेकर पांच जनवरी, 2015 में भोजपुर जिले के नवादा मुहल्ले के विमल कुमार ने निदेशक प्रशासन को जांच करने की मांग की थी, जिसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी रमण कुमार ने जांच के आदेश जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं वरीय डिप्टी कलक्टर को दिया था, लेकिन वरीय उप समाहर्ता एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी के स्थानांतरण होने के कारण मामले की जांच नहीं हो सकी. पुन: जिला पदाधिकारी अरविंद कुमार वर्मा द्वारा कार्यालय ज्ञापांक 1025 दिनांक 11.9.2017 के द्वारा नयी कमेटी का गठन किया गया, जिसकी रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर देने की बात कही गयी है.
क्या कहता है नियमावली और कैसे हुई बहाली : कार्मिक के नियमावली 13293 दिनांक 1991 के अनुसार विभागीय कर्मियों के सेवाकाल में मृत्यु के उपरांत उनके आश्रितों को संबंधित विभाग द्वारा जिला अनुकंपा समिति ने उनके नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने का प्रावधान है, जिसके अनुसार अनुकंपा समिति द्वारा निर्णय लेकर संबंधित विभाग को योग्यता के अनुरूप नियुक्ति के लिए अनुशंसा की जाती है, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष, 1994 में नियम कानून को ताक पर रखते हुए जिला शिक्षा स्थापना समिति से ही कुल 13 विभिन्न पदों पर नियुक्ति बिना अनुकंपा समिति के सहमति के अपने स्तर से कर दी गयी.
निदेशक प्राथमिक शिक्षा बिहार पटना के पत्रांक 1578 दिनांक 29.7.1994 में विभाग को निर्देशित किया गया था कि अनुकंपा समिति से पारित प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए विभागाध्यक्ष के पास भेजने का प्रावधान है, लेकिन शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए जिला शिक्षा स्थापना समिति सक्षम प्राधिकार हैं. किसी भी परिस्थिति में प्राथमिक शिक्षा के अधिनस्थ कार्यालय में नियुक्ति न की जाये. उसके लिए निदेशक माध्यमिक शिक्षा के पत्रांक 141 दिनांक 4.3.1994 ही प्रभावी रहेगा.
लोक शिकायत निवारण अधिनियम में दिया गया आवेदन
यह मामला काफी पुराना हो चुका है, लेकिन लोक शिकायत अधिनियम में विनय चौबे ने मामले की जांच को लेकर आवेदन दिया है.उन्होंने आरोप लगाया है कि हिमाद्री सहित 13 लोगों का नियुक्ति कार्मिक नियमावली के अनुसार नहीं किया गया है.
जांच कर होगी कार्रवाई
यह एक बहुत ही गंभीर मामला है, जिसकी जांच कर संबंधित पदाधिकारियों पर गलत तरीके से नौकरी पाकर ड्यूटी कर रहे लोगों पर कार्रवाई की जायेगी. इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गयी है.
अरविंद कुमार वर्मा, जिलाधिकारी बक्सर
गलत ढंग से हुई नियुक्ति
हिमाद्री कुमार (लिपिक)
इनके पिता स्व. ललन लाल प्राथमिक विद्यालय कठतर में पदस्थापित थे. जिनकी मृत्यु सेवाकाल में हो गयी थी. जिला शिक्षा स्थापना समिति के ज्ञापांक 1056 दिनांक 22.12.1994 के द्वारा इन्हें दिनांक 21.10.1994 की बैठक में लिए गये निर्णय के आलोक में लिपिक/आदेशपाल के पद पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था. जिला शिक्षा अधीक्षक के द्वारा दिनांक 18.4.1995 को डीईओ बक्सर को उक्त प्रस्ताव के आलोक में नियुक्ति का प्रस्ताव प्रतिवेदित किया गया था. डीईओ बक्सर के द्वारा उनके प्रस्ताव को नियुक्ति के लिए क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशक पटना प्रमंडल पटना को प्रस्ताव भेजा था, जिसके आलोक में क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशक द्वारा इनकी नियुक्ति क्षेत्रीय संवर्ग के लिपिक के पद पर कर दी. इसमें ऊपर दिये गये कार्मिक नियमावली का पालन नहीं किया गया, जिसकी पुष्टि तत्कालीन जिला शिक्षा अधीक्षक के द्वारा स्थापना उप समाहर्ता बक्सर को भेजे गये पत्रांक 265 दिनांक 10.12.2008 से होती है.
शैल कुमारी-(लिपिक)
इनके भी नियुक्ति में नियमावली के प्रावधानों का पालन नहीं करते हुए शिक्षा विभाग ने गलत तरीके से नियुक्ति कर दी है. वर्तमान में शैल कुमारी बक्सर उच्च विद्यालय बक्सर में लिपिक के तौर पर पदस्थापित हैं.
ईश्वरानंद विश्वकर्मा (सहायक शिक्षक) इनकी भी बहाली इसी तरह की गयी है. जांच के दौरान इन पर भी गाज गिरने की संभावना प्रबल है. फिलहाल यह सहायक शिक्षक के रूप में बक्सर जिले में पदस्थापित हैं.
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