गंगा में प्रवाहित किये जा रहे लावारिस शव

बक्सर : भारतीय संस्कृति की अस्मिता पतित पावनी गंगा आज कचरा व गंदगी से दूषित होते जा रही है. धरती पर मनुष्यों का पाप धोनेवाली गंगा आज शहरों का कचरा बहानेवाली गंगा बन गयी है. राजा सागर के वंशज का उद्धार करने के लिए धरती पर उतरी गंगा अपने तिरस्कार पर आंसू बहा रही है. […]
बक्सर : भारतीय संस्कृति की अस्मिता पतित पावनी गंगा आज कचरा व गंदगी से दूषित होते जा रही है. धरती पर मनुष्यों का पाप धोनेवाली गंगा आज शहरों का कचरा बहानेवाली गंगा बन गयी है. राजा सागर के वंशज का उद्धार करने के लिए धरती पर उतरी गंगा अपने तिरस्कार पर आंसू बहा रही है. इतना ही नहीं अब तो मवेशियों को भी मरने के बाद लोग गंगा में परवाह करना शुरू कर दिये हैं. मानों तो मैं गंगा मां हूं, न मानो तो बहता पानी. जीवनदायिनी की दुर्दशा देख लोग यह गाना गुनगुनाने लगे हैं. बक्सर शहर के कई ऐसे घाट हैं, जहां गंगा में पैर डालते ही अज्ञात शव, माला-फूल व मलवा से टकरा जाने से रूह कांप जाता है.
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