कभी-कभार खुलता है राजपुर का एपीएचसी

Updated at : 13 Jul 2017 4:00 AM (IST)
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कभी-कभार खुलता है राजपुर का एपीएचसी

कुव्यवस्था. एपीएचसी में दवाओं का भी है टोटा मरीजों को उठानी पड़ती है काफी परेशानी, इलाज के लिए जाना पड़ता है दूर सिमरी : प्रखंड के राजपुर कला में स्थित एपीएचसी में इलाज कराने जाने वाले मरीजों को अस्पताल में जाने पर जड़ा ताला दिखायी पड़ता है. परेशान होकर मरीजों को दूसरे जगह इलाज के […]

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कुव्यवस्था. एपीएचसी में दवाओं का भी है टोटा

मरीजों को उठानी पड़ती है काफी परेशानी, इलाज के लिए जाना पड़ता है दूर
सिमरी : प्रखंड के राजपुर कला में स्थित एपीएचसी में इलाज कराने जाने वाले मरीजों को अस्पताल में जाने पर जड़ा ताला दिखायी पड़ता है. परेशान होकर मरीजों को दूसरे जगह इलाज के लिए जाना पड़ता है. इस अस्पताल में कभी कभार ही डाॅक्टर आते हैं. वहीं इस अस्पताल में काम करने वाले कर्मी महीने में एक बार अपनी हाजिरी बनाने के लिए आते हैं. लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी मरीजों का इलाज नहीं हो पाता है. इस एपीएचसी में दवाओं का टोटा है. स्थानीय लोगों ने बताया कि राजपुर कला पंचायत के बीस डेरा में सरकार की ओर से एपीएचसी का निर्माण कराया गया था. ताकि दियाराचंल क्षेत्र में रहने वाले लोगों का इलाज हो सके.
यहां पर डॉक्टर सहित अन्य कर्मियों का भी पदस्थापना किया गया. लेकिन, यहां कर्मी महीने में एक बार बस अपनी हाजिरी बनाने के लिए आते हैं. इसके बाद उनका कभी भी दर्शन नहीं होता है. वहीं इस अस्पताल में कार्य करने वाले डॉक्टर भी कभी कभार आते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कभी अस्पताल का ताला खुलता है. और मरीज इलाज के लिए जाते हैं. तो उनसे दवा नहीं होने की बात कह वापस लौटा दिया जाता है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सुदूर इलाके में जब एपीएचसी स्थापित की गयी थी. तो लोगों में इस बात की उम्मीद जगी थी कि बेहतर इलाज होगा, लेकिन, उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया. ऐसे में इलाके के लोगों को अपना इलाज कराने के लिए झोला छाप डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ता है. इससे वहां उनका शोषण होता है. या लंबी दूरी तय कर दूसरे स्थान पर अपना इलाज कराने के लिए जाना पड़ता है.
क्या कहते हैं प्रभारी
राजपुर कला एपीएचसी का दुरुस्त करने का निर्देश कई बार डॉक्टर व अन्य कर्मियों को दिया गया है. लेकिन, इसमें सुधार नहीं हो रहा है. नतीजतन इसकी जानकारी वरीय पदाधिकारियों को दे गयी है. ताकि इन पर सख्त कार्रवाई हो.
डॉ सदाशिव पांडेय, पीएचसी प्रभारी सिमरी
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