जज्बे को सलाम! 6 बार हुए फेल, 7वीं बार में अमीन से सीधे BDO बने औरंगाबाद के विकास कुमार
BPSC Success Story:औरंगाबाद के दाउदनगर निवासी विकास कुमार ने 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर बीडीओ पद पर चयन पाया. अमीन की नौकरी करते हुए सातवें प्रयास में मिली सफलता.
BPSC Success Story: (ओम प्रकाश) कहते हैं कि सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाते. औरंगाबाद जिले के दाउदनगर प्रखंड के अंछा गांव निवासी विकास कुमार ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है. 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में सफलता हासिल कर उनका चयन ग्रामीण विकास पदाधिकारी (BDO) के पद पर हुआ है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
किसान परिवार के बेटे ने बढ़ाया जिले का मान
विकास कुमार के पिता अवधेश सिंह किसान हैं, जबकि माता अनीता देवी गृहिणी हैं. बेटे के अधिकारी बनने की खबर मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई. मां ने बेटे के साथ गांव के मंदिर में पूजा-अर्चना कर ईश्वर का आभार व्यक्त किया. माता-पिता ने कहा कि उनका सपना था कि बेटा बड़ा अधिकारी बने, जो अब पूरा हो गया.

अमीन की नौकरी के साथ जारी रखी तैयारी
विकास कुमार पिछले तीन वर्षों से रोहतास जिले के डेहरी में अमीन के पद पर कार्यरत हैं. सरकारी नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने नियमित रूप से स्व-अध्ययन जारी रखा और कठिन मेहनत के दम पर बीडीओ बनने का सपना साकार किया. उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान पर निर्भर रहने के बजाय अपने अनुशासन और आत्मविश्वास को सफलता का आधार बनाया.
लगातार असफलताओं के बाद सातवें प्रयास में मिली जीत
विकास वर्ष 2016 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कुछ समय दिल्ली में रहकर भी पढ़ाई की. वे दो बार यूपीएससी की मुख्य परीक्षा तक पहुंचे और जेपीएससी की मुख्य परीक्षा में भी शामिल हुए. बीपीएससी में छह बार मुख्य परीक्षा तक पहुंचने के बावजूद अंतिम चयन नहीं हो सका. 67वीं बीपीएससी परीक्षा में वे मात्र चार अंकों से चयन से चूक गए थे. एक बार प्रारंभिक परीक्षा में भी असफल रहे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

युवाओं को दिया सफलता का मंत्र
विकास कुमार ने बताया कि सातवें प्रयास में उन्हें सफलता मिली. उन्होंने कहा कि धैर्य, निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. शादी और नौ महीने के बच्चे की जिम्मेदारी के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी. उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह नहीं रोक सकतीं, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए.
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By Vivek Pandey
विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.
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