बेऊर जेल में सस्पेंड अफसरों की एंट्री से हड़कंप, 4 सिपाही सस्पेंड, FIR दर्ज, जांच में क्या पता चला

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बेऊर जेल में सस्पेंड अफसरों की एंट्री पर 4 सिपाही निलंबित

Beur Jail Case: बेऊर जेल में निलंबित अधिकारियों के कथित प्रवेश और फाइलों से छेड़छाड़ के मामले में कारा विभाग ने कार्रवाई की है. जांच में शुरुआती स्तर पर गड़बड़ी मिलने के बाद चार सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है. डिप्टी जेलर समेत कई अधिकारियों से जवाब मांगा गया है.

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Beur Jail Case: पटना की मशहूर बेऊर जेल में सस्पेंड चल रहे अधिकारियों की गैर-कानूनी तरीके से एंट्री कराने और कागजातों से छेड़छाड़ करने के मामले में जेल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही मिलने के बाद जेल के डिप्टी जेलर को शो-कॉज जारी किया गया है. इसके अलावा चार सिपाहियों को तुरंत प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया है. तीन अलग-अलग जिलों के जेलरों से भी जवाब मांगा गया है.

सस्पेंड अफसरों ने जेल में घुसकर फाइलों से की छेड़छाड़

जेल विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ कि जो अधिकारी पहले से सस्पेंड चल रहे थे, उन्हें चुपचाप बेऊर जेल के अंदर आने दिया गया. आरोप है कि इन अफसरों ने जेल में जाकर बिना किसी इजाजत के कई जरूरी और गुप्त फाइलों को खंगाला. सरकारी कागजों से छेड़छाड़ की गई और कुछ बेहद जरूरी सबूत जेल परिसर से बाहर भी ले जाए गए. अगर जांच में ये सभी बातें पूरी तरह सच साबित होती हैं, तो इसे बेऊर जेल की सुरक्षा में अब तक की सबसे बड़ी चूक माना जाएगा.

डिप्टी जेलर को कारण बताओ नोटिस, 4 सिपाही सस्पेंड

इस मामले में बेऊर जेल के डिप्टी जेलर सुधीर शर्मा को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है. उनसे पूछा गया है कि उनकी ड्यूटी के दौरान सस्पेंड अफसर जेल के अंदर कैसे घुसे और इस लापरवाही के लिए उन पर कार्रवाई क्यों न की जाए.

जांच के आधार पर चार सिपाहियों- संजीव कुमार गुप्ता, धीरज कुमार, उमेश कुमार और अजय जान मरांडी को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है. इन चारों पर आरोप है कि इन्होंने सस्पेंड अफसरों को जेल के अंदर घुसने और काम करने में मदद की थी.

शेखपुरा, सुपौल और कटिहार के जेल अधीक्षकों से भी जवाब तलब

मामले की परतें खुलते ही जेल विभाग ने शेखपुरा, सुपौल और कटिहार के जेल अधीक्षकों को भी नोटिस जारी कर दिया है. विभाग ने पूछा है कि सस्पेंड अफसरों की तैनाती उनके जिलों की जेलों में होने के बाद भी इसकी सही जानकारी समय पर हेडक्वार्टर को क्यों नहीं भेजी गई. विभाग अब इस बात की जांच में जुटा है कि कहीं अफसरों ने जानबूझकर यह जानकारी तो नहीं छिपाई थी.

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बेऊर थाने में FIR दर्ज, पुलिस और विभाग दोनों कर रहे जांच

मामला बेहद गंभीर होने के कारण बीते 28 जुलाई को पटना के बेऊर थाने में इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है. अब इस मामले की पुलिस जांच और जेल विभाग की अंदरूनी जांच दोनों एक साथ चल रही हैं. जेल प्रशासन का कहना है कि जो भी अधिकारी या कर्मचारी इसमें दोषी पाया जाएगा, उस पर विभागीय कार्रवाई तो होगी ही, साथ ही कानूनी तौर पर जेल भी भेजा जाएगा.

बेऊर जेल बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल और सुरक्षित मानी जाने वाली जेलों में से एक है. ऐसे में सस्पेंड चल रहे अफसरों का अंदर जाना, गुप्त फाइलें देखना और सबूतों को बाहर ले जाना जेल के पूरे सिस्टम पर सवाल उठा रहा है.

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परितोष शाही

लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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