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नालंदा विवि में 8 वां इंडिया थिंक टैंक फोरम आज से

Updated at : 11 Jan 2026 10:22 PM (IST)
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नालंदा विवि में 8 वां इंडिया थिंक टैंक फोरम आज से

प्रतिनिधि, राजगीर. नालंदा विश्वविद्यालय, ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के सहयोग से दो दिवसीय इंडिया थिंक टैंक फोरम के 8 वां संस्करण आज से शुरू होगा.

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प्रतिनिधि, राजगीर. नालंदा विश्वविद्यालय, ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के सहयोग से दो दिवसीय इंडिया थिंक टैंक फोरम के 8 वां संस्करण आज से शुरू होगा. यह इंडिया थिंक टैंक फोरम ओआरएफ की प्रमुख वार्षिक पहल है, जो देशभर के नीति अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों और संस्थागत नेतृत्व को एक साझा मंच पर लाती है. यह मंच नीति संवाद, अंतर-क्षेत्रीय सहयोग और विचारों के आदान-प्रदान को सशक्त करता है. ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन भारत के अग्रणी सार्वजनिक नीति थिंक टैंकों में से एक है, जो अपने अनुसंधान के साथ-साथ भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रायसीना डायलॉग के वार्षिक आयोजन के लिए भी जाना जाता है. विश्व के प्राचीनतम ज्ञान केंद्रों में से एक नालंदा विश्वविद्यालय में इस फोरम का आयोजन क्षेत्रीय विविधता, बौद्धिक विकेंद्रीकरण और समावेशी नीति विमर्श के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है. यह इस विचार को सुदृढ़ करता है कि भारत की नीतिगत चर्चाएँ देश के विभिन्न क्षेत्रों और बौद्धिक परंपराओं से उभरनी चाहिए. विश्वविद्यालय में आयोजित इंडिया थिंक टैंक फोरम 2026 का आठवाँ संस्करण “बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत: आंतरिक दृढ़ता का निर्माण” विषय पर केंद्रित है. इस फोरम का उद्देश्य वैश्विक परिवर्तनों और उनके प्रति भारत की प्रतिक्रियाओं पर गहन मंथन करते हुए विमर्श को ठोस एवं व्यवहारिक नीतिगत अंतर्दृष्टियों से जोड़ना है. दो दिवसीय फोरम में भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था, सतत विकास, प्रौद्योगिकी और सामाजिक परिवर्तन पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे.

इन सत्रों का उद्देश्य;

• आने वाले दशक की जटिलताओं के लिए भारत की नीतिगत और थिंक टैंक संरचनाओं की तैयारी का आकलन करना;

• विचारों के परस्पर आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना;

• घरेलू तैयारियों और वैश्विक परिवर्तनों के आपसी संबंधों का विश्लेषण करना; तथा

• रणनीतिक दृष्टि और नीति नवाचार में थिंक टैंकों की भूमिका को सशक्त करना है.

इस फोरम में देशभर के 75 थिंक टैंकों से 80 से अधिक प्रतिभागी भाग लेंगे. प्रमुख वक्ताओं एवं प्रतिभागियों में समीर सरन, अध्यक्ष, ORF; प्रो. सचिन चतुर्वेदी, कुलपति, नालंदा विश्वविद्यालय; हर्ष वी. पंत, उपाध्यक्ष, ORF; प्रदीप चौहान, महानिदेशक, नेशनल मैरीटाइम फ़ाउंडेशन; टी.पी. श्रीनिवासन, महानिदेशक, केरल इंटरनेशनल सेंटर; लवीश भंडारी, अध्यक्ष एवं वरिष्ठ फ़ेलो, सेंटर फ़ॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस; डी. धनुराज, संस्थापक-अध्यक्ष, सेंटर फ़ॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च; आर.पी.एस. भदौरिया, अतिरिक्त महानिदेशक, सेंटर फ़ॉर लैंड वारफेयर स्टडीज़; राउल वी. रोड्रिगेज, उपाध्यक्ष, वॉक्सन यूनिवर्सिटी; प्रियंका भिड़े, सह-संस्थापक, कुबर्नियन इनिशिएटिव; बिरेन नंदा, वरिष्ठ फ़ेलो, दिल्ली पॉलिसी ग्रुप; रुही नियोग, सुरक्षा एवं विदेश नीति विश्लेषक, इंस्टिट्यूट ऑफ पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज़; तथा गुरु प्रकाश पासवान, विज़िटिंग फ़ेलो, इंडिया फ़ाउंडेशन शामिल हैं. इस महत्वपूर्ण आयोजन के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय नीति विमर्श को दिशा देने, सहयोगात्मक विचारों को और सशक्त करने और परिवर्तनशील वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका से जुड़े विचारों को आगे बढ़ाने को संकल्पित है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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