राजगीर में पुरुषोत्तम एकादशी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, पहले शाही स्नान में जुटे लाखों श्रद्धालु

Published by : Vikas Jha Updated At : 27 May 2026 5:33 PM

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शाही स्नान के लिए जाते संत-महात्मा

Nalanda News: राजगीर मलमास मेले के पहले शाही स्नान में लाखों श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं ने भाग लिया. भजन-कीर्तन, शोभायात्रा और जयघोष से पूरी धर्मनगरी भक्तिमय माहौल में डूबी रही.

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Nalanda News (रामविलास की रिपोर्ट): ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पारंपरिक मलमास मेला का पहला शाही स्नान बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ. पुरुषोत्तम एकादशी के अवसर पर धर्मनगरी राजगीर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबी रही. सुबह से ही विभिन्न अखाड़ों, आश्रमों और धार्मिक शिविरों से संत-महंत, योगी, महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर एवं उनके अनुयायियों की भव्य शोभायात्राएं गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और जयघोष के साथ कुंड क्षेत्र की ओर बढ़ती रहीं.

जयघोष और भजन-कीर्तन से गूंजा राजगीर

शाही स्नान के दौरान ‘हर-हर महादेव’, ‘जय श्रीराम’ और ‘राधे-राधे’ के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा. श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते और नाचते-गाते नजर आए. कई संत वाहन के शीर्ष पर विराजमान होकर शोभायात्रा का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि बड़ी संख्या में साधु-संत और भक्त पैदल चलते हुए आध्यात्मिक उत्साह का परिचय दे रहे थे.

नानक कुंड समेत कई पवित्र स्थलों पर हुआ स्नान

पुरुषोत्तम एकादशी के अवसर पर पहला शाही स्नान मुख्य रूप से नानक कुंड (नारद कुंड) में संपन्न हुआ. इसके अलावा सप्तधारा, ब्रह्मकुंड, सूर्यकुंड, सरस्वती और वैतरणी नदी में भी संत-महंतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्नान कर धर्म और आध्यात्मिक परंपरा का निर्वहन किया. ब्रह्मकुंड क्षेत्र में शाही स्नान से पूर्व राजगीर-तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पंडा कमेटी के डॉ. धीरेंद्र उपाध्याय, सचिव विकास उपाध्याय एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा अखाड़ों के प्रमुख संतों और पीठाधीश्वरों का अंगवस्त्र देकर स्वागत किया गया.

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन रहा अलर्ट

शाही स्नान को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा. जिलाधिकारी कुंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक भारत सोनी स्वयं विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर सुरक्षा एवं व्यवस्था की मॉनिटरिंग करते नजर आए. सप्तधारा और ब्रह्मकुंड के प्रवेश द्वार पर वरीय दंडाधिकारी, बिहारशरीफ एवं हिलसा के एएसपी सहित बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारी तैनात रहे.

अलग-अलग रूट से पहुंचे अखाड़ों के संत

प्रशासन द्वारा विभिन्न अखाड़ों और धार्मिक संस्थानों के लिए अलग-अलग रूट निर्धारित किए गए थे. खाक चौक, नरहट छावनी, नवादा छावनी, बड़ी संगत, कबीर आश्रम, गायत्री शक्तिपीठ, कैलाश आश्रम, जापानी मंदिर और झुनकी बाबा मंदिर सहित कई स्थानों से साधु-संत शोभायात्रा निकालते हुए कुंड क्षेत्र पहुंचे. प्रत्येक जत्थे के साथ दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी एवं पर्याप्त पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई थी.

तीन लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

मलमास मेला के पहले शाही स्नान में करीब तीन लाख श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान लगाया गया है. भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे. प्रमुख अखाड़ों के साथ एम्बुलेंस एवं स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई थी, जबकि अग्निशमन विभाग को भी अलर्ट मोड में रखा गया था. प्रशासन द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के पालन के साथ महत्वपूर्ण स्थलों की वीडियोग्राफी भी कराई गई.

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