राजगीर : नगर परिषद के विस्तार की तैयारी तेज, बिरचैत, सीमा और झालर गांव हो सकते हैं शामिल

Nalanda News : बिहार में नगर निकायों के पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है, जिससे राजगीर नगर परिषद के विस्तार की संभावना बढ़ गई है। बिरचैत, सीमा और झालर गांवों को शामिल किए जाने की चर्चा है, जो प्रशासनिक और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा.
Nalanda News : बिहार में नगर निकायों के पुनर्गठन की प्रक्रिया एक बार फिर काफी तेज हो गई है. राज्य सरकार ने सभी जिलों से आगामी 30 अगस्त तक नगर निकायों के पुनर्गठन संबंधी आवश्यक प्रस्ताव मांगे हैं. सरकार के इस निर्देश के बाद राजगीर नगर परिषद के दायरे के विस्तार की संभावना काफी बढ़ गई है.
स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक चर्चा राजगीर प्रखंड के बिरचैत, सीमा और झालर गांवों को नगर परिषद के नए दायरे में शामिल किए जाने को लेकर की जा रही है. माना जा रहा है कि इस पुनर्गठन के बाद राजगीर नगर परिषद का स्वरूप और अधिक व्यापक हो जाएगा.
नईपोखर पंचायत की अजीब स्थिति
राजगीर प्रखंड के अंतर्गत आने वाली नईपोखर पंचायत की प्रशासनिक स्थिति इस समय सबसे अलग बनी हुई है. इस पंचायत के एकमात्र गांव बिरचैत को छोड़कर बाकी के सभी गांव पहले ही चरणबद्ध तरीके से राजगीर नगर परिषद में शामिल किए जा चुके हैं. यहां तक कि जिस नईपोखर गांव के नाम पर इस पूरी पंचायत का नाम रखा गया है, वह खुद भी अब राजगीर नगर परिषद का एक हिस्सा बन चुका है.
इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में नईपोखर पंचायत अब भी ग्रामीण निकाय के रूप में अस्तित्व में है और बिरचैत इसका एकमात्र बचा हुआ गांव है. ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था और विकास के लिए बिरचैत को नगर परिषद में शामिल करने की मांग तेज हो गई है.
नाहुब पंचायत के गांवों की भी समान स्थिति
इसी प्रकार, प्रखंड की नाहुब पंचायत की वर्तमान स्थिति भी लगभग नईपोखर पंचायत के समान ही बनी हुई है. इस पंचायत के भी अधिकांश गांव पहले ही राजगीर नगर परिषद में शामिल हो चुके हैं. केवल सीमा और झालर गांव ही अभी तक नगर परिषद की सीमा से बाहर बचे हुए हैं.
राजगीर-बिहारशरीफ फोरलेन मार्ग से सीधे जुड़े ये दोनों गांव अब पूरी तरह से शहरी स्वरूप ग्रहण कर चुके हैं और यहां नगर जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. नाहुब पंचायत का मुख्य मुख्यालय भी पहले ही नगर परिषद में शामिल हो चुका है. वर्तमान मुखिया का अपना पैतृक गांव हसनपुर तथा बेलौआ भी नगर परिषद का ही हिस्सा है.
शेष बचे छोटे गांवों को अलग रखने का औचित्य नहीं
इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में नाहुब पंचायत अब भी पूरी तरह से कायम है और पंचायत का संचालन लगातार जारी है. स्थानीय लोगों का इस संबंध में कहना है कि जब पंचायतों के अधिकांश बड़े गांव नगर परिषद में शामिल हो चुके हैं, तो शेष बचे बेहद छोटे गांवों को इससे अलग रखने का अब कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं रह गया है.
इस विसंगति के कारण प्रशासनिक कार्यों के सुचारू संचालन और विभिन्न विकास योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन में कई तरह की व्यावहारिक कठिनाइयां हर दिन उत्पन्न होती हैं.
जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से की मांग
इस गंभीर समस्या को देखते हुए पूर्व प्रखंड प्रमुख सुधीर कुमार पटेल, भाजपा नेता शैलेंद्र कुमार तथा वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार, महेंद्र यादव और अनीता सिन्हा ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन से मांग की है. उन्होंने पुनर्गठन प्रस्ताव में बिरचैत, सीमा और झालर गांवों को राजगीर नगर परिषद में शामिल करने की मजबूत अनुशंसा करने का आग्रह किया है.
उनका स्पष्ट कहना है कि इस कदम से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और इन गांवों के लोगों को शहरी विकास योजनाओं का पूरा लाभ समय पर मिल सकेगा. फिलहाल, सरकार के स्तर पर होने वाले इस अंतिम पुनर्गठन निर्णय पर सभी स्थानीय लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं.
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