राजगीर में श्रीराम कथा: चित्रकूट के आचार्य शिवदीप ने समझाया खड़ाऊं राज का महत्व, राम भक्ति के रस में डूबे हजारों श्रद्धालु

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 24 May 2026 3:31 PM

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आचार्य शिवदीप महाराज

Malmas Mela 2026: नालंदा जिले के राजगीर में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के आठवें दिन रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. चित्रकूट के व्यास आचार्य शिवदीप महाराज ने भरत मिलाप प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं. महाराज ने कहा कि राम कथा समाज को संस्कारों और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है. पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष और भजनों से गुंजायमान रहा.

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Malmas Mela 2026(रामविलास): ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरी राजगीर में पुरुषोत्तम मास (मलमास मेला) के पावन अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का आठवां दिन रविवार को अपार श्रद्धा, भक्ति और दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच संपन्न हुआ. कथा पंडाल में सुबह से ही दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी रही.

महोत्सव के अष्टम दिवस पर चित्रकूट धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथाव्यास आचार्य शिवदीप महाराज ने ‘भरत मिलाप’ प्रसंग का ऐसा मार्मिक और जीवंत वर्णन किया कि पूरा कथा पंडाल प्रभु श्रीराम की भक्ति के रस में सराबोर हो गया.

राजसुख को ठुकराना और भाई के लिए सर्वस्व त्याग ही ‘भरत’ है

व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य शिवदीप महाराज ने कहा कि भरत और प्रभु श्रीराम का मिलन केवल दो भाइयों का सांसारिक मिलन नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए त्याग, निष्कपट प्रेम, धर्म, अटूट समर्पण और मर्यादा की सर्वोच्च मिसाल है.

 भरत जी समस्त राजसुख और अयोध्या के वैभव को लात मारकर वन में प्रभु श्रीराम को वापस लाने की विनती करने पहुंचे थे. किंतु, जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने पिता के वचनों की मर्यादा निभाने के संकल्प को सर्वोपरि रखा, तो भरत जी ने उनके निर्णय को सहर्ष शिरोधार्य किया. भरत जी प्रभु श्रीराम की खड़ाऊं (चरण पादुकाओं) को सिर पर रखकर अयोध्या लाए और उन्हें राजसिंहासन पर स्थापित कर स्वयं एक सेवक के रूप में 14 वर्षों तक कुटिया में रहकर राज्य का संचालन किया. आचार्य श्री ने जोर देते हुए कहा कि यह प्रसंग आज की स्वार्थी दुनिया में मानव जीवन को निस्वार्थ प्रेम, पारिवारिक कर्तव्य और उच्च आदर्शों के पालन की सबसे बड़ी प्रेरणा देता है.

भक्ति रस में डूबा पंडाल, ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गुंजायमान हुआ राजगीर

व्यासपीठ से जब आचार्य महाराज ने राम-भरत मिलन के कारुणिक क्षणों का सस्वर पाठ किया, तो कथा स्थल का वातावरण अत्यंत भावुक हो उठा. इस मार्मिक प्रसंग को सुनते-सुनते पंडाल में मौजूद सैकड़ों महिला व पुरुष श्रद्धालुओं की आंखें आंसुओं से नम हो गईं.

आचार्य शिवदीप महाराज ने कहा कि राम कथा केवल कोई सामान्य धार्मिक आयोजन या मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह मानव समाज को संस्कार, आपसी सद्भाव, भाईचारे और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का एक अत्यंत दिव्य और पवित्र माध्यम है.

कथा के बीच-बीच में पूज्य महाराज द्वारा गाए गए भजनों और कीर्तनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए. राम नाम संकीर्तन और ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी उद्घोषों से पूरा राजगीर मेला क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर दिखा. रविवार की छुट्टी होने के कारण रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक पुण्य लाभ प्राप्त किया.

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