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महाशिवरात्रि आज, श्रद्धालुओं ने शहर के शिवालयों को सजाया-संवारा

शहर में महाशिवरात्रि की तैयारी जोरो पर है. शहर के सभी प्रमुख शिवालयों को बेहतर तरीके से सजाया गया है.

बिहारशरीफ.

शहर में महाशिवरात्रि की तैयारी जोरो पर है. शहर के सभी प्रमुख शिवालयों को बेहतर तरीके से सजाया गया है. शिव भक्त टोली बना कर शिवालयों की साफ-सफाई व रंग-रोगन के कार्य में जुटे हैं. शहर के बड़ी पहाड़ी ग्रिड परिसर में बने शिवालय के कर्ताधर्ता योगी प्रसाद यादव ने बताया कि बुधवार को महाशिवरात्रि का त्योहार बनाया जाना है. पावर ग्रिड मंदिर में दुधिया रौशनी की व्यवस्था खास तौर पर की गयी है. महाशिवरात्रि के दिन पूरे दिन विशेष पूजा-अर्चना का प्रावधान है. बुधवार की संध्या विशेष विधि-विधान से भगवान शिव व मां पार्वती का विवाह वैदिक मंत्रोच्चारण से कराया जायेगा. इस मौके पर भक्तों की भीड़ जुटती है. जिसकी व्यवस्था मंदिर कमेटी की ओर से पूरी की गयी है. महाशिवरात्रि को लेकर शहर के कई स्थानों से कलश यात्रा व जुलूस भी निकाले जाते हैं. भक्तों द्वारा इसकी तैयारी भी पूरी कर ली गयी है.

शिवरात्रि अर्थात कल्याण की रात्रि :

शिवरात्रि अर्थात कल्याण की रात्रि. भगवान शिव के निराकार से साकार रूप में प्रकट होने का पर्व है. भगवान शिव के निराकार से साकार रूप में प्रकट होने का पर्व है. महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला भगवान शिव का अत्यंत प्रिय महाशिवरात्रि पर्व भोलेनाथ जी के भक्तों के लिए सौभाग्यशाली एवं महान पुण्य अर्जित करने वाला है. शिवरात्रि का अर्थ ही है कल्याण की रात्रि. पूरे दिन और रात्रि के चारों प्रहर भगवान भोलेनाथ जी के शिवलिंग का दुग्ध, गंगा जल, बेल पत्र से मंत्र उच्चारण के द्वारा रुद्राभिषेक किया जाता है. शिव पुराण की ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में आदि देव भगवान शिव करोड़ सूर्य के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुये. महाशिवरात्रि पर्व आत्मा को पवित्र तथा समस्त पापों का नाश करने वाला है. ज्योतिषाचार्य दयानंद पांडेय ने बताया कि फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसीलिए इस पर्व को शिव और पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में भी मनाया जाता है. भूत भावन भगवान सदा शिव की प्रसन्नता के लिए रुद्र सूक्त पाठ का विशेष महत्व बताया गया है. पूजा में भगवान शंकर को सबसे प्रिय जलधारा है. इसलिए उनके पूजन में रुद्राभिषेक की परंपरा है. ज्योतिषाचार्य दयानंद पांडेय बताते हैं कि शिवलिंग का अभिषेक आशुतोष भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने के साधक को उनका कृपा पात्र बना देता है. शिव पुराण संहिता में कहा गया है कि सर्वज्ञ भगवान शिव शंकर ने संपूर्ण देहधारियों के सारे मनोरथों की सिद्धि के लिए इस ओम नमः शिवाय मंत्र का प्रतिपादन किया है. यह आदि मंत्र संपूर्ण विद्या का बीज है. उन्हीं शिव का स्वरूप है. लंका प्रवेश के लिए समुद्र पर सेतु निर्माण के समय भगवान श्री राम ने रामेश्वरम में महादेव जी को प्रसन्न करने के लिए स्वयं शिवलिंग की स्थापना की और भगवान शिव का आवाहन किया था. जो की शंभू स्तुति के नाम से ब्रह्म पुराण में वर्णित है. महाशिवरात्रि पर्व हमें यह प्रेरणा देता है कि हमें अपने जीवन को किस प्रकार व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के कल्याण में लगाना चाहिए.

अनुमंडलाधिकारी ने किया निरीक्षणबुधवार को बिहारशरीफ के अनुमंडलाधिकारी वैभव काजले नीतीन द्वारा शिवरात्री महापर्व को लेकर बिहारशरीफ नगर निगम क्षेत्र में निकाले जाने वो कलश यात्रा व जुलूस से संबंधित मार्ग का निरीक्षण किया. उन्होंने जुलूस संचालक को निर्देश दिया कि अनुज्ञप्ति में वर्णित शर्तों का अनुपालन करते हुए शांतिपूर्वक सौहार्द वातावरण के साथ में जुलूस का संचालन करेंगे. किसी भी परिस्थिति में यातायात व्यवस्था प्रभावित नहीं हो यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है. इसके लिए पर्याप्त सहयोगियों को साथ में रखेंगे.

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Prabhat Khabar News Desk
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