पावापुरी-नवादा नई रेल लाइन परियोजना के खिलाफ किसानों का आंदोलन तेज, 23 गांवों के प्रतिनिधियों ने बनाई रणनीति

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रेल परियोजना के खिलाफ किसान आंदोलन को मिलेगा नया विस्तार

रेल लाइन (सांकेतिक तस्वीर)

प्रस्तावित पावापुरी–नवादा नई रेल लाइन परियोजना के विरोध में किसानों ने आंदोलन को और संगठित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं. 23 प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों ने भूमि अधिग्रहण के विरोध और एकजुटता का संकल्प लिया है. आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है.

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प्रस्तावित पावापुरी–नवादा नई रेल लाइन परियोजना के विरोध में किसानों ने आंदोलन को और संगठित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं.

गुरुवार की देर शाम नालंदा और नवादा जिले के 23 प्रभावित गांवों के किसान प्रतिनिधियों की ऑनलाइन बैठक हुई, जिसमें आंदोलन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के साथ आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई.

भूमि अधिग्रहण का विरोध और एकजुटता का संकल्प

बैठक में प्रतिनिधियों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण से किसानों के सामने खेती और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

इसलिए किसानों की सहमति और उनकी समस्याओं के समाधान के बिना किसी भी स्तर पर भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा. सभी ने एकजुट होकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया.

जनसंपर्क अभियान और कानूनी पहलुओं पर चर्चा

किसानों ने निर्णय लिया कि प्रत्येक प्रभावित गांव में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग आंदोलन से जुड़ सकें. साथ ही भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा.

बैठक में शामिल प्रमुख गांवों के प्रतिनिधि

बैठक में बडरावां के अनीश सिंह, पछियाडीह के रवि मिश्रा, कुम्भी के अजय सिंह, अतौआ के वसंत सिंह, भोला बिगहा के मनीष कुमार, उडसा के मंटू कुमार, मोहद्दीपुर के रूपेंद्र कुमार, सतौआ के कमल किशोर वर्मा, भागवत बिगहा के कपिल देव, इशुआ के विजेंद्र प्रसाद, मरकट्टा के राजेश सिंह तथा प्यारेपुर के अखिलेश सिंह सहित 23 गांवों के प्रतिनिधि शामिल हुए.

आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय

बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा. इसके लिए नियमित बैठकें आयोजित होंगी, सभी गांवों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन एवं सरकार के समक्ष किसानों की मांगों को सामूहिक रूप से रखा जाएगा.


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Ranjit Singh

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