नालंदा में तेजी से बढ़ रहीं लाइफस्टाइल बीमारियां, युवाओं को 30 की उम्र में ही हो रहा शुगर-बीपी और मोटापा
Published by : Vivek Singh Updated At : 29 May 2026 9:44 AM
सांकेतिक तस्वीर
Nalanda News : नालंदा जिले में शुगर, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा तेजी से गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब 30 से 35 वर्ष के युवा भी इन बीमारियों की चपेट में तेजी से आ रहे हैं. जिले में बिहारशरीफ सबसे संवेदनशील क्षेत्र बनकर उभरा है, जहां शुगर के मरीजों की संख्या 10 से 13 प्रतिशत और हाई बीपी के मामलों की दर 18 से 22 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.
Nalanda News : (कंचन कुमार) नालंदा जिले में शुगर, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा तेजी से गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब 30 से 35 वर्ष के युवा भी इन बीमारियों की चपेट में तेजी से आ रहे हैं. जिले में बिहारशरीफ सबसे संवेदनशील क्षेत्र बनकर उभरा है, जहां शुगर के मरीजों की संख्या 10 से 13 प्रतिशत और हाई बीपी के मामलों की दर 18 से 22 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.
कम उम्र में बढ़ रही डायबिटीज और हाई बीपी की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पहले डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां 45 वर्ष की उम्र के बाद देखने को मिलती थीं, लेकिन अब युवाओं में भी तेजी से इसके मामले बढ़ रहे हैं. 35 वर्ष के बाद प्रीडायबिटीज और हाई बीपी की शिकायतें आम होती जा रही हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इसका सीधा असर लोगों की कार्यक्षमता, पारिवारिक आय और जीवन गुणवत्ता पर पड़ रहा है.
तला-भुना खाना और मीठी चाय बन रही बीमारी की वजह
डॉक्टरों के मुताबिक सफेद चावल, आलू, तला-भुना नाश्ता, बार-बार मीठी चाय पीना और फास्ट फूड का बढ़ता चलन युवाओं को तेजी से बीमार बना रहा है. चिकित्सक डॉ. अखलेश प्रसाद इसे “मेटाबॉलिक डिजीज ट्रायंगल” बताते हैं. राजगीर में होटल और पर्यटन आधारित लाइफस्टाइल, जबकि हिलसा क्षेत्र में तला-भुना नाश्ता और मीठी चाय का बढ़ता चलन बीमारी बढ़ाने की बड़ी वजह माना जा रहा है.
जिले के 18 प्रतिशत तक लोग ओवरवेट श्रेणी में
सरकारी स्वास्थ्य सर्वे और एनएफएचएस-5 रिपोर्ट के अनुसार नालंदा में मोटापे की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. जिले के करीब 15 से 18 प्रतिशत वयस्क अब ओवरवेट या ओबीज़ श्रेणी में पहुंच चुके हैं. सिलाव, गिरियक, रहुई और हरनौत जैसे प्रखंड भी अब उभरते हुए हाई रिस्क जोन माने जा रहे हैं.
खानपान और दिनचर्या सुधारने पर विशेषज्ञों का जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बीमारियों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय महंगा इलाज नहीं, बल्कि संतुलित खानपान और बेहतर जीवनशैली है. नालंदा क्षेत्र के लिए सत्तू, चना, मखाना, दही, सलाद और हरी सब्जियों वाला भोजन सबसे बेहतर माना गया है. डॉक्टरों ने रोज कम से कम 45 मिनट पैदल चलने, मीठी चाय कम करने और तला-भुना भोजन सीमित करने की सलाह दी है.
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लेखक के बारे में
By Vivek Singh
विवेक सिंह माता सीता की धरती और मिथिला का द्वार कहे जाने वाले समस्तीपुर जिले से आते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले #The_Newsdharma के साथ डिजिटल मीडिया, ग्राउंड रिपोर्टिंग , और न्यूज़ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रहा है. सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, युवा, महिला सुरक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं. सरल, तथ्यात्मक और प्रभावी लेखन शैली के माध्यम से पाठकों तक महत्वपूर्ण खबरें और मुद्दे पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. NGO अमर शहीद बिपिन सिंह फाउंडेशन के साथ जुड़कर सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण ,रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी कार्य करने का अनुभव हैं.
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