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बिहार के 47 प्रखंड ऐसे जिसकी भूमि लेकिन भवन नहीं, 57 प्रखंडों के पास न तो अपना भवन है ना हीं भूमि...

Updated at : 25 Jul 2024 12:09 PM (IST)
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prakhand karyalay news | Bihar News There are many blocks of Bihar which neither have land nor their own office.

Bihar News: राज्यभर में कुल 104 प्रखंड कार्यालय दूसरे विभागों के अधीन कार्यालयों में संचालित हो रहे हैं. इनमें 47 प्रखंड ऐसे हैं जिसकी भूमि है, लेकिन भवन उपलब्ध नहीं हैं. जबकि 57 प्रखंडों में न तो प्रखंडों के अपने भवन हैं और न ही भूमि उपलब्ध है.

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Bihar News: राज्यभर में कुल 104 प्रखंड कार्यालय दूसरे विभागों के अधीन कार्यालयों में संचालित हो रहे हैं. इनमें 47 प्रखंड ऐसे हैं जिसकी भूमि है, लेकिन भवन उपलब्ध नहीं हैं. जबकि 57 प्रखंडों में न तो प्रखंडों के अपने भवन हैं और न ही भूमि उपलब्ध है.

सामुदायिक भवन, कृषि भवन तथा दूसरे सरकारी कार्यालयों के साथ इन प्रखंड कार्यालयों का संचालन हो रहा है. जिलों की ओर से ग्रामीण विकास विभाग को इसकी सूची भेजी गई है. विभाग ने इसकी समीक्षा की है.

राजधानी में भी कई प्रखंडों का अपना भवन नहीं

बता दें कि पटना के पुनपुन, मनेर, घोसवारी, नालंदा के गिरियक, करायपरशुपराय. भागलपुर के गौराडीह, सन्हौला, नवगछिया में जमीन तो है, मगर अपना प्रखंड भवन उपलब्ध नहीं है.

मधुबनी के कलुआही, मधेपुरा के शंकरपुर, मुजफ्फरपुर के औराई, बंदरा, रोहतास के काराकाट, सीवान के जीरादेई, लकड़ीनवीगंज, सारण के तरैया में भी भूमि है, मगर अपना प्रखंड कार्यालय नहीं है. पूर्वी चंपारण के कोटवा, पिपराकोठी, पूर्णिया के भवानीपुर, बक्सर के चौगाई, चौसा, केसठ, चक्की में भी जमीन है, मगर अपना प्रखंड भवन नहीं है.

इन प्रखंडों में भी भूमि उपलब्ध, मगर अपना भवन नहीं

औरंगाबाद के ओबरा, कटिहार के डंडवाेरा, किशनगंज के किशनगंज, कैमूर के भगवानपुर, खगड़िया के खगड़िया सदर, मासी. बता दें कि गया के गुरारू, गोपालगंज के भाछे, कटैया, पंचदेवरी, जमुई के इस्लामनगर अलीगंज का प्रखंड कार्यालय दूसरे कार्यालयों में चल रहे हैं.

दरभंगा के कुशेश्वर पूर्वी, गाड़ाबौराम, बेगूसराय के डंडारी, नावाकाठी, साम्हो अखा कुर्हा, इसी तरह लखीसराय के लखीसराय, शिवहर के डुमरी कटसरी, शेखपुरा के चेवाड़ा, समस्तीपुर के सिंघिया, विभूतीपुर, सहरसा के पत्थरघाट, सत्तारकटैया, बनमा इटहरी प्रखंड की भी यही स्थिति है.

पटना के तीन प्रखंड ऐसे न तो उनकी अपनी जमीन न ही भवन…

पटना के दुल्हिनबाजार, संपतचक, खुसरूपुर में न तो अपनी जमीन ही है और न ही अपना भवन है. इसी तरह कटिहार के कुरसेल, समेली, कैमूर के नुआंव, गया के बांकेबाजार, आमस, मोहड़ा, जमुई के गिद्धौर, बरहट जहानाबाद के मोदनगंज, दरभंगा के तारडीह कितरपुर, नवादा के काशीचक, नारदीगंज की भी यही स्थिति है.

पश्चिमी चंपारण की बात करें तो बेतिया, मधुबनी, जोगापट्टी, पूर्वी चंपारण के बनकटवा, संग्रामपुर, फेनहारा, तेतरिया, बांका के फल्लीडुमर में भी न तो प्रखंड कार्यालयों की अपनी जमीन है और न ही अपना भवन उपलब्ध है.

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बिहार के इन प्रखंडों में भी न तो अपनी जमीन न हीं भवन

बेगूसराय के वीरपुर, मंसूरचक, गढ़पुरा, भागलपुर के इस्माइलपुर, नारायणपुर, नाथनगर, मधेपुरा के बिहारीगंज, मुुंगेर के जमालपुर, असरगंज, रोहतास के तिलौथु, पिपरिया. लखीसराय के रामगढ़ चौक, चानन, वैशाली के देसरी, सहदेईबुजुर्ग, राजापाकर, भगवानपुर, पटेढ़ीबेलसर, चेहराकला, सीवान के नौतन, हसनपुर.

सारण के मकेर, नगरा, इसुआपुर, रिविलगंज, पानापुर, सीतामढ़ी के चाछौत, परसौनी, सुपौल के मरौना प्रखंड के न तो जमीन है और न ही प्रखंड कार्यालय हैं.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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