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Bihar News: सावधान! बच्चों की आंखों पर भारी पड़ रहा पिज्जा-बर्गर, पटना के डॉक्टरों का चौंकाने वाला खुलासा

Bihar News: अगर आपका बच्चा पिज्जा, बर्गर और फास्ट फूड का दीवाना है, तो यह खबर आपको चौंका सकती है. पटना के बड़े अस्पतालों की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, फास्ट फूड का बढ़ता शौक बच्चों को अंधेपन की ओर धकेल रहा है.डॉक्टरों की मानें तो इसकी बड़ी वजह बच्चों की बिगड़ती खानपान और लाइफस्टाइल है.

Bihar News: पटना ऑप्थेल्मोलॉजिकल सोसाइटी की एक हालिया रिपोर्ट ने बच्चों की आंखों की सेहत को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. पटना एम्स, पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस, राजेंद्रनगर नेत्रालय और निजी अस्पतालों की ओपीडी में पहुंचे सैकड़ों बच्चों की जांच में पाया गया कि फास्ट फूड का अधिक सेवन उनकी आंखों पर सीधा असर डाल रहा है.

रिपोर्ट के बाद बच्चों और अभिभावकों के लिए जागरूकता अभियान चलाने का फैसला लिया गया है.

जंक फूड से रेटिना हो रहा है प्रभावित

पटना ऑप्थेल्मोलॉजिकल सोसाइटी के एक विस्तृत सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि जंक फूड, खासकर पिज्जा और बर्गर का अधिक सेवन बच्चों की आंखों के पर्दे (रेटिना) को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर रहा है. पटना एम्स, पीएमसीएच और आईजीआईएमएस जैसे बड़े संस्थानों के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने पाया है कि जो बच्चे हफ्ते में कई बार फास्ट फूड खाते हैं, उनकी आंखों के पर्दे में सूजन आ रही है और कम उम्र में ही उन्हें मोटा चश्मा लग रहा है.

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर खान-पान की इन आदतों को तुरंत नहीं बदला गया, तो बच्चों में स्थायी दृष्टि दोष का खतरा बढ़ सकता है.

आंखों के पर्दे में सूजन से लेकर कम नजर तक

आईजीआईएमएस के नेत्र रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विद्याभूषण कुमार बताते हैं कि ओपीडी में आने वाले कई बच्चे आंखों में सूजन, लालिमा और कम दिखने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं.

जांच के दौरान सामने आया कि इन बच्चों में शारीरिक गतिविधि कम है, मोटापा बढ़ रहा है और खानपान में पिज्जा-बर्गर जैसे फास्ट फूड की मात्रा ज्यादा है. यही आदतें ड्राई आई, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम और मायोपिया जैसी समस्याओं को जन्म दे रही हैं.

बार-बार इस्तेमाल तेल बना रहा आंखों का दुश्मन

पटना ऑप्थेल्मोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार सिंह का कहना है कि पिज्जा और बर्गर बनाने में एक ही तेल का बार-बार इस्तेमाल किया जाता है. इससे बेंजीन जैसे हानिकारक तत्व बढ़ते हैं, जो आंखों के पर्दे में सूजन का कारण बनते हैं.

फास्ट फूड में प्रिजर्वेटिव्स की अधिकता, विटामिन की कमी और चीज का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में मोटापा और विटामिन ए की कमी पैदा करता है, जिससे आंखों की रोशनी कमजोर होती है और आगे चलकर मोतियाबिंद व मैक्यूलर डिजेनेरेशन का खतरा भी बढ़ सकता है.

खानपान और लाइफस्टाइल से बदलेगी तस्वीर

डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों की आंखों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है. हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, फल, अंडा, मछली और मेवे आंखों को पोषण देते हैं. इसके साथ ही बच्चों को रोजाना धूप में खेलने, स्क्रीन टाइम सीमित रखने और पढ़ते समय सही रोशनी का ध्यान रखने की जरूरत है. छोटी-सी लापरवाही बच्चों की आंखों पर भारी पड़ सकती है.

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Pratyush Prashant
Pratyush Prashant
कंटेंट एडिटर और तीन बार लाड़ली मीडिया अवॉर्ड विजेता. जेंडर और मीडिया विषय में पीएच.डी. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में कार्यरत. डेवलपमेंट, ओरिजनल और राजनीतिक खबरों पर लेखन में विशेष रुचि. सामाजिक सरोकारों, मीडिया विमर्श और समकालीन राजनीति पर पैनी नजर. किताबें पढ़ना और वायलीन बजाना पसंद.

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