Bihar News: बिहार में शुरू करें मखाना-शहद का बिजनेस, सरकार देगी 5 करोड़ तक का फंड, जानें कैसे उठाएं सब्सिडी का फायदा

Updated at : 04 Jan 2026 1:04 PM (IST)
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AI जनरेटेड इमेज प्रतीकात्मक तस्वीर

Bihar News: अब मखाना, शहद, फल-सब्जी या औषधीय पौधों के कारोबार का सपना सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगा. बिहार सरकार ने कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ऐसी नीति लागू की है, जो निवेशकों को सीधे आर्थिक सहारा देगी. कृषि विभाग की इस नई पहल से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि राज्य के किसानों की आय में भी जबरदस्त इजाफा होगा.

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Bihar News: राज्य सरकार ने बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति के तहत कृषि प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना और विस्तार के लिए अनुदान देने का फैसला किया है. इस नीति के तहत मखाना, शहद, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण, मक्का, बीज, औषधीय और सुगंधित पौधे तथा चाय से जुड़े उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार का उद्देश्य कृषि को सिर्फ खेती तक सीमित न रखकर उसे उद्योग और रोजगार से जोड़ना है.

25 लाख से 5 करोड़ तक की परियोजनाओं को मिलेगा लाभ

नई नीति के अनुसार न्यूनतम 25 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं इस अनुदान के दायरे में आएंगी. इसका लाभ व्यक्तिगत निवेशक के साथ-साथ प्रोप्राइटरशिप फर्म, साझेदारी फर्म, एलएलपी और किसान उत्पादक कंपनी यानी एफपीसी भी ले सकेंगी. इससे छोटे उद्यमियों के साथ-साथ संगठित किसान समूहों के लिए भी उद्योग लगाने का रास्ता खुलेगा.

ऋण से जुड़ी होगी पूंजीगत सब्सिडी

इस योजना के तहत दी जाने वाली पूंजीगत सब्सिडी पूरी तरह से ऋण से जुड़ी होगी. परियोजना लागत का कम से कम 20 प्रतिशत मियादी ऋण बैंक या वित्तीय संस्थान से लेना अनिवार्य होगा. सरकार का मानना है कि इससे निवेश की गंभीरता बनी रहेगी और योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर उतरेंगी.

विशेष वर्गों को मिलेगा अतिरिक्त अनुदान

सरकार ने सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए विशेष वर्गों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के निवेशकों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजीगत अनुदान मिलेगा. वहीं महिला उद्यमी, एसिड अटैक पीड़ित, युद्ध विधवाएं, दिव्यांग और तृतीय लिंग के निवेशकों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान का लाभ दिया जाएगा.

जमीन और अनुमति की शर्तें भी तय

आवेदन करने वाले निवेशक के पास परियोजना भूमि का स्वामित्व होना चाहिए या फिर कम से कम 30 वर्षों के लिए पंजीकृत पट्टा अनुबंध जरूरी होगा. इसके साथ ही भूमि उपयोग परिवर्तन यानी सीएलयू की अनुमति सक्षम प्राधिकारी से लेना अनिवार्य किया गया है. इससे औद्योगिक निवेश में कानूनी स्पष्टता बनी रहेगी.

कृषि से उद्योग और रोजगार की ओर बिहार

मखाना और शहद जैसे उत्पादों में बिहार की पहले से मजबूत पहचान है. ऐसे में प्रसंस्करण उद्योग लगने से किसानों को बेहतर दाम, स्थानीय स्तर पर रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी. इस योजना से बिहार का कृषि क्षेत्र धीरे-धीरे मूल्यवर्धन और निर्यात की दिशा में बढ़ सकता है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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