Bihar Election 2025: तेजस्वी की राघोपुर सीट पर बंपर वोटिंग, क्या बदल जाएगी तस्वीर? सियासी मायने समझिए

Bihar Election 2025: पहले फेज की वोटिंग ने बिहार की राजनीति का टेम्परेचर और बढ़ा दिया है. बिहार में औसतन 60.13% मतदान हुआ. राघोपुर सीट पर भी बंपर वोटिंग हुई. वोटिंग के इस पैटर्न ने नया संदेश दे दिया है. समझिये क्या है इसके सियासी मायने?
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार (06 नवंबर) को शाम पांच बजे तक औसतन 60.13 प्रतिशत वोटिंग हुई है. वहीं, वैशाली जिले की बात करें तो औसतन 59.45 फीसदी वोटिंग हुई. तेजस्वी यादव और आरजेडी की गढ़ माने जाने वाली राघोपुर विधानसभा सीट पर 70.66% फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. इस सीट पर आरजेडी नेता और महागठबंधन के सीएम फेस तेजस्वी यादव खुद चुनावी मैदान में हैं. एनडीए ने यहां से बीजेपी की टिकट से सतीश कुमार को चुनावी मैदान में उतारा है.
महुआ सीट भी चर्चा में…
वहीं, महुआ विधानसभा क्षेत्र में 54.88 फीसदी वोटिंग दर्ज हुई. इस सीट से लालू यादव के बड़े बेटे और तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव चुनावी मैदान में हैं. तेज प्रताप की सीधी टक्कर आरजेडी के उम्मीदवार और यहां के मौजूदा विधायक मुकेश रौशन से है. आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव के द्वारा पार्टी और परिवार से बाहर किये जाने के बाद तेज प्रताप ने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाकर महुआ से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. यहां से NDA ने एलजेपी (रामविलास) के प्रत्याशी संजय कुमार को चुनावी मैदान में उतारा है.
राघोपुर का 2020 चुनाव में क्या था हाल?
2020 के मुकाबले 2025 में करीब 12% अधिक वोटिंग हुई है. राघोपुर विधानसभा सीट पर 2020 और 2025 के चुनावों में वोटिंग परसेंटेज के बीच फर्क साफ देखा जा सकता है. 2020 में इस सीट पर कुल 58.15% मतदान हुआ था, जबकि 2025 में यह बढ़कर लगभग 70.66% तक पहुंच गया. इस बार के वोट प्रतिशत में हुई बढ़ोत्तरी को ग्रामीण इलाकों की अधिक सक्रियता, महिला और युवा वोटर्स की भागीदारी, और कड़ी चुनावी टक्कर से जोड़कर देखा जा रहा है.
राघोपुर सीट के बारे में समझें…

बिहार की राजनीति में राघोपुर विधानसभा क्षेत्र हॉट सीटों में से एक है. वैशाली जिले में आने वाला यह क्षेत्र हमेशा से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के परिवार का गढ़ माना जाता रहा है. वर्तमान में यह सीट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहां से बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विधायक हैं और एक बार फिर वह इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. इसी वजह से यह एक VVIP सीट बन गया है.
राघोपुर के मुद्दे क्या हैं?
राघोपुर के लोगों के लिए विकास हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है. दियारा क्षेत्र होने के कारण यहां बुनियादी ढांचे का विकास एक बड़ी चुनौती है. प्रमुख मुद्दों में-
- कनेक्टिविटी
- बाढ़ की समस्या
- शिक्षा और स्वास्थ्य
- रोजगार
किसी सीट पर अधिक मतदान के क्या होते हैं मायने?

किसी भी सीट पर अधिक मतदान का मतलब केवल ज्यादा वोटों की गिनती तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके कई राजनीतिक और सामाजिक मायने होते हैं.
अधिक मतदान के संभावित मायने…
राजनीतिक उलटफेर की संभावना
अक्सर माना जाता है कि जब किसी सीट पर सामान्य से कहीं अधिक मतदान होता है, तो वहां लोगों में बदलाव की इच्छा खास तौर पर बढ़ी होती है. इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि मतदाता मौजूदा प्रतिनिधि या सरकार से असंतुष्ट हैं, या अधिक जोश के साथ किसी नए चेहरे/पार्टी को मौका देना चाह रहे हैं.
कड़ा मुकाबला
अधिक मतदान कई बार क्षेत्र में कड़ा मुकाबला होने का संकेत देता है. जब दोनों प्रमुख उम्मीदवार या पार्टियों के समर्थक बड़े पैमाने पर वोट डालते हैं तो कुल मतदान प्रतिशत बढ़ जाता है.
एंटी-इनकम्बेन्सी और पोलराइजेशन
अधिक मतदान कभी-कभी सत्ताधारी दल के खिलाफ “एंटी-इनकम्बेंसी” और पोलराइज्ड चुनावी माहौल का इशारा भी करता है, जहां कई वर्ग एकजुट होकर वोट डालते हैं.
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लेखक के बारे में
By Aniket Kumar
अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.
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