Bihar Diwas 2023: 111 साल का हुआ बिहार, इन मामलों में रहा सबसे आगे, जानकर आपको भी होगा गर्व

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बिहार आज 111 साल को हो गया है. इन सौ से अधिक वर्षों में प्रदेश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. पहले बंगाल से अलग होकर नया प्रदेश बनने फिर 1935 में ओड़िशा का अलग होना और अखिर में 2000 में झारखंड का अलग हो जाने का दंश झेल चुके बिहार ने बाद के वर्षों में कई क्षेत्रों में बुलंदियों को भी छूआ है.

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पटना. बिहार आज 111 साल को हो गया है. इन सौ से अधिक वर्षों में प्रदेश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. पहले बंगाल से अलग होकर नया प्रदेश बनने फिर 1935 में ओड़िशा का अलग होना और अखिर में 2000 में झारखंड का अलग हो जाने का दंश झेल चुके बिहार ने बाद के वर्षों में कई क्षेत्रों में बुलंदियों को भी छूआ है. इतने वर्षों में बिहार में ऐसी कई चीजें हुईं हैं जो देश के लिए नजीर बना है.

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बिहार देश का रोल माडल

शासन- प्रशासन के मामलों से लेकर सामाजिक आंदोलन के क्षेत्र में बिहार देश का रोल माडल बना है. महिलाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में पंचायती राज संस्थानों में आधी आबादी को आरक्षण देने तथा सरकारी नौकरियों में उन्हें 33 फीसदी सीटें सुरक्षित करने वाला बिहार देश का पहला राज्य है. पूर्ण शराबबंदी कानून को लागू करने वाला भी बिहार देश का इकलौता राज्य है. अब कई प्रदेशों से शराबबंदी के बिहार माडल को लागू करने की मांग उठ रही है.

कई सिग्नेचर बिल्डिंग

बिहार में कई सिग्नेचर बिल्डिंग हैं. हाल में भी सरकार ने कई नये सिग्नेचर बिल्डिंग का निर्माण कराया है.जो कला एवं निर्माण की दृष्टिकोण से उत्कृष्ट उदाहरण बन चुके हैं. बेली रोड पर बना बिहार संग्रहालय इनमें से एक है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बिहार दौरे के क्रम में से कुछ पल निकाल इस संग्रहालय को जाकर देखा. सभ्यता द्वार, विधानसभा का नया भवन और सरदार पटेल भवन ऐसे ही कुछ बेहतरीन उदाहरण हैं.

बिहार ने जमींदारी उन्मूलन कानून

आजादी के बाद के आरंभिक दिनों में ही बिहार ने जमींदारी उन्मूलन कानून बनाया. पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के कार्यकाल में तत्कालीन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री केबी सहाय की अगुवाइ में यह काम धरातल पर उतरा. पिछले डेढ़ दशकों में राज्य सरकार के कार्यों ने देश-विदेश में बिहार की अलग पहचान दिलायी.

ब्यूरोक्रेसी के क्षेत्र में टॉप पर बिहार

ब्यूरोक्रेसी के क्षेत्र में टॉप पर रहने वाले बिहार के अधिकारी भी भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख पदों को सुशोभित कर रहे हैं. यहीं नहीं, कई राज्यों के मुख्य सचिव व डीजीपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बिहारी मूल के ही अधिकारी काबिज हैं. ब्यूरोक्रेसी आज भी बिहार के युवाओं की पहली पसंद हैं. देश में सबसे अधिक बिहार के ही छात्र यूपीएससी की परीक्षा देते हैं.

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