बिहार बोर्ड रिजल्ट: राहुल व रिशु की खुदकुशी अभिभावकों के लिए अलार्म, सुसाइड नोट पर गंभीर होने की जरूरत

बिहार बोर्ड के दो छात्रों ने इंटर रिजल्ट आने के बाद खुदकुशी कर ली है. पहले राहुल और अब रिशु की आत्महत्या ने सबको झकझोर दिया है. अभिभावकों के लिए ये आइना है. अगर वो अभी सतर्क नहीं होते हैं तो आगे उनके पास पछताने के सिवा कुछ नहीं बचेगा.
Bihar Board: बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. पिछले दिनों रिजल्ट जारी हुआ तो कई घरों में मिठाई बंटने वाली खुशी इस रिजल्ट से आई. लेकिन कुछ घर ऐसे भी थे जिन्हें मायूस होना पड़ा. ये मायूसी थी छात्रों के फेल हो जाने की. वहीं बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा में असफलता को कुछ छात्र सहन नहीं कर सके और अपनी जान दे दी. पहले राहुल और अब रिशु ने खुदकुशी की है. ये घटनाएं अभिभावकों के लिए भी एक अलार्म है. आज प्रतिस्पर्धा के इस दौर में वो अगर अपने बच्चों को मनलायक रिजल्ट नहीं आने पर अपराधी बना देते हैं तो उन्हें फिर हाथ मलने के सिवा कुछ नहीं मिलने वाला.
बिहार बोर्ड की इंटर परीक्षा में फेल हो जाने का सदमा 19 वर्षीय छात्र रिशु कुमार पाठक बर्दाश्त नहीं कर पाया और पटना में उसने फंदे से लटककर अपनी जान दे दी. रिशु पुनाईचक में किराये के मकान में रहकर पढ़ाई करता था. रिजल्ट जब जारी हुआ तो रिशु फिजिक्स में फेल हो गया था. उसके बाद से ही वो अंदर ही अंदर घुट रहा था. रिशु ने जो सुसाइड नोट लिखा है उसमें अपने पिता से माफी मांगी है. रिशु ने सुसाइड नोट में लिखा- पिताजी, हम जिंदगी में कुछ नहीं कर पाये, हम किसी लायक नहीं हैं… प्लीज, हमें माफ कर दीजिएगा.
इससे पहले शेखुपरा में एक छात्र ने आत्महत्या की थी. इंटर परीक्षा में वो फेल नहीं हुआ था बल्कि अधिक उम्मीद पाले राहुल को सेकेंड डिवीजन लायक अंक ही आ सका था. उसकी नाराजगी ये थी कि उसने परीक्षा में टॉप करने के लिए किसी चंदन से 40 हजार रुपए में सेटिंग की थी. वो 27 हजार 200 रुपए दे चुका था. लेकिन वो फर्स्ट डिवीजन भी नहीं हो सका. सुसाइड नोट में उसने लिखा कि चंदन दा ने धोखा दे दिया. राहुल लखीसराय का रहने वाला था और शेखपुरा में किराये के कमरे में रहकर पढ़ाई करता था.
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राहुल और रिशु के सुसाइड नोट आज के हालात को आइना है. अभिभावक आजकल अपने बच्चों के ऊपर उम्मीदों का ऐसा गट्ठर रख देते हैं जिसके तले बच्चे असफल होने के बाद कोई आप्सन ही नहीं तलाश सकते. अगर वो अभिभावकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके तो उनसे नजरें मिलाने लायक नहीं रहते.
अपने बच्चों के प्रदर्शन को परिजनों को दिखाने और वाहवाही लूटने की जो प्रथा बढ़ी है वो भी बच्चों के लिए मुसीबत बनती जा रही है. जबकि ऐसे अनेकों उदाहरण अपने ही बीच हैं जहां बिना 99 व 90 प्रतिशत अंक लाए छात्र हर क्षेत्र में सफलता का डंका बजा रहे हैं. जरुरत है कि आप अपने बच्चों पर उम्मीदों का गट्ठर नहीं लादें. उन्हें हतोत्साहित नहीं होने दें बल्कि उनके हर प्रयास को अपनाते हुए खुशी से उन्हें आगे का रास्ता दिखाएं. ताकि कल पछताने की जरुरत नहीं पड़े.
Published By: Thakur Shaktilochan
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