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बिहार में बीएड डिग्रीधारी प्राइमरी शिक्षकों की जगी उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में नीतीश सरकार

Updated at : 08 Jan 2024 11:59 AM (IST)
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बिहार में बीएड डिग्रीधारी प्राइमरी शिक्षकों की जगी उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में नीतीश सरकार

बिहार में बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों की फिर से उम्मीद जगी है. नीतीश सरकार अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है. बीएड डिग्री वाले शिक्षकों को प्राथमिक कक्षाओं के लिए अयोग्य माना गया है और पटना हाईकोर्ट के इस फैसले से हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में है.

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Bihar Teacher News: बिहार में पहली से पांचवीं कक्षा के बीएड योग्यताधारी नियोजित शिक्षक फिलहाल बने रहेंगे. ऐसे शिक्षकों को सेवा में बनाए रखने के लिए पटना उच्च न्यायालय के फैसले को राज्य सरकार की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जायेगी. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में शिक्षा विभाग द्वारा महाधिवक्ता की राय ली गयी है. सरकार सर्वोच्च न्यायालय में जल्द एसएलपी दायर करेगी .

हजारों शिक्षक हो चुके बहाल

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस पर शिक्षा विभाग के स्तर पर सैद्धांतिक सहमति पहले ही बन चुकी थी. बीएड योग्यताधारी नियोजित शिक्षक छठे चरण में पहली से पांचवीं कक्षा में अध्यापक के रूप में बहाल हुए थे. ऐसे शिक्षकों की संख्या तकरीबन दस हजार बतायी जा रही है. पटना उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद से छठे चरण में नियोजित पहली से पांचवीं कक्षा के बीएड योग्यताधारी दस हजार शिक्षकों में खलबली मची है.

पटना हाईकोर्ट ने सुनाया है फैसला

दरअसल, पटना उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में 6 दिसंबर,2023 के अपने एक न्यायादेश में स्पष्ट किया है कि राज्य में प्राथमिक विद्यालयों में बीएड डिग्री धारक शिक्षक के रूप में नियुक्त करने के योग्य नहीं होंगे. इन विद्यालयों में बीएड उम्मीदवारों को शिक्षक के तौर पर नियुक्ति पर विचार नहीं किया जा सकता है.

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बिहार के बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों को मिली है निराशा

पटना हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आलोक में यह फैसला पिछले साल दिसंबर महीने में देकर स्पष्ट किया था कि बिहार के स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं यानी कक्षा 1 से 5 तक के लिए बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होगी. इन कक्षाओं के लिए केवल डीएलएड डिग्री वाले शिक्षक नियुक्त होंगे. न्यायाधीश के विनोद चंद्रन और न्यायाधीश राजीव राय की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया था. ललन कुमार व अन्य के द्वारा दायर की गयी रिट याचिकाओं पर सुनवाई तब की गयी थी.

हजारों शिक्षकों की नौकरियां हो सकती हैं प्रभावित

पटना हाईकोर्ट से आए आदेश से हजारों शिक्षकों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. इन शिक्षकों की नियुक्ति इस मामले की सुनवाई के दौरान ही हुई है. कोर्ट को बताया गया था कि एनसीटीई के द्वारा वर्ष 2018 में अधिसूचना जारी की गयी है जिसमें बीएड डिग्री वाले शिक्षकों को भी प्राथमिक कक्षाओं के लिए योग्य कहा गया है. कोर्ट को उस ब्रिज कोर्स के बारे में बताया गया जिसका जिक्र एनसीटीई की अधिसूचना में है. जिसके तहत अगर बीएड डिग्री लेकर कोई शिक्षक प्राथमिक स्कूल में नियुक्त होना चाहता है तो उसे दो साल के अंदर ब्रिज कोर्स करना जरूरी है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सर्वेश शर्मा बनाम केंद्र सरकार व अन्य के मामले में एनसीटीई के इस अधिसूचना को रद्द कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद पर यह साफ कर दिया था कि प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने के लिए डीएलएड डिग्री वाले शिक्षकों को ही नियुक्त किया जाएगा.

पटना हाईकोर्ट के फैसले से बीएड शिक्षकों में मायूसी

पटना हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया है कि एनसीटीई की गजट 2010 के अनुसार नौकरी कर रहे उम्मीदवार योग्य होंगे. लेकिन 11 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने एनसीटीई के 2018 के गजट को रद्द कर दिया था. उसके अनुसार नियुक्त उम्मीदवार अयोग्य घोषित होंगे. वहीं सरकार को यह भी निर्देश दिया गया कि रिक्त सीटों पर स्टेट मेरिट लिस्ट के आधार पर प्राथमिक कक्षाओं में डीएलएड डिग्री वाले योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जाए. बता दें कि बिहार सरकार की ओर से एनसीटीई की 2018 की एक अधिसूचना का तब हवाला देकर कहा गया था कि एनसीटीई ने बीएड पास अभ्यर्थियों को प्राथमिक शिक्षक के पद पर नियुक्ति की मंजूरी दी और 2021 में हाईकोर्ट की बेंच ने सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दे दी थी. वहीं शर्त थी कि नियुक्ति के बाद फैसला आने तक कोई उम्मीदवार नौकरी के लिए क्लेम नहीं करेगा.

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ThakurShaktilochan Sandilya

लेखक के बारे में

By ThakurShaktilochan Sandilya

डिजिटल मीडिया का पत्रकार. प्रभात खबर डिजिटल की टीम में बिहार से जुड़ी खबरों पर काम करता हूं. प्रभात खबर में सफर की शुरुआत 2020 में हुई. कंटेंट राइटिंग और रिपोर्टिंग दोनों क्षेत्र में अपनी सेवा देता हूं.

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