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Bihar के बगहा में मिली अमेरिका की अमेजॉन नदी में पाई जाने वाली सकरमाउथ कैटफिश, जानें किस बात का है खतरा

Updated at : 21 Sep 2022 5:22 PM (IST)
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Bihar के बगहा में मिली अमेरिका की अमेजॉन नदी में पाई जाने वाली सकरमाउथ कैटफिश, जानें किस बात का है खतरा

Bihar: बनारस के गंगा के बाद बगहा के हरहा नदी में मिली सकरमाउथ कैटफिश (मछली) ने लोगों को हैरत में डाल दिया है. बुधवार की सुबह बनचहरी गांव के समीप हरहा नदी में मछली मारने के दौरान मछुआरे के जाल में उक्त मछली फंसी गयी. अजीबोगरीब मछली मिलने के बाद मछली को देखने के लिए लोगों का तांता लग गया.

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Bihar: बनारस के गंगा के बाद बगहा के हरहा नदी में मिली सकरमाउथ कैटफिश (मछली) ने लोगों को हैरत में डाल दिया है. बुधवार की सुबह बनचहरी गांव के समीप हरहा नदी में मछली मारने के दौरान मछुआरे के जाल में उक्त मछली फंसी गयी. अजीबोगरीब मछली मिलने के बाद मछली को देखने के लिए लोगों का तांता लग गया. वीटीआर के साथ काम करने वाले संस्था डब्ल्यूटीआई और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इस मछली को देखकर हैरत में है.

नदियों के लिए बड़ा खतरा

नदी के सामने एक नया संकट मछली के रूप में आया जो यहां हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिका की अमेजॉन नदी में पाई जाती है. मछली का नाम सकरमाउथ कैटफिश है. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के एरिया कोऑर्डिनेटर कमलेश मौर्या ने बताया कि यह चिंता का विषय है. क्योंकि यह मांसाहारी है. चंपारण के नदियों के लिए यह खतरनाक है. मछली हरहा नदी में मिली है. लेकिन इसका घर भारत के नदिया नहीं बल्कि यहां से हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका की अमेजॉन नदी में है.

पर्यावरण से जुड़े लोग जता रहे हैं चिंता

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के एरिया कोऑर्डिनेटर कमलेश मौर्य और डब्ल्यूटीआई के सुब्रत लेहरा ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह मछली मांसाहारी है और अपने इकोसिस्टम के लिए खतरा भी है. अजीब से मुंह वाली मछली साउथ अमेरिका के अमेजॉन नदी में हजारों किलोमीटर दूर पाई जाती है. इन लोगों ने दावा किया है कि स्थानीय नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र का यह मछली विनाश कर सकती है. बता दें कि वर्ष 2003-4 में भी ऐसा ही एक मछली गंडक नदी मिली थी. जिसके बाद से विलुप्त हो गयी थी.

हजारों किलोमीटर दूर कहां से पहुंची मछली

अब लोगों के अंदर सवाल उठ रहा है कि आखिर हजारों किलोमीटर दूर साउथ अमेरिका के अमेजॉन नदी में पाई जाने वाली यह मछली बिहार में कैसे पहुंच गई. इस बाबत कमलेश मौर्या ने बताया कि इस मछली अपनी अलग पहचान के वजह से लोग इसे एक्युरम में पालते हैं. लेकिन एक्युरम में काफी छोटी होती है. जबकि एक नदी में इसका आकार बढ़ गया है. हो सकता है कि किसी ने एक्युरम से छोड़ा हो और इसका आकार धीरे-धीरे बढ़ गया हो. पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा इसलिए है क्योंकि यह मछली मांसाहारी है और आसपास के जीव-जंतुओं को खाकर जिंदा रहती है. इस वजह से यह किसी महत्वपूर्ण मछली या जीव को पनपने नहीं देती है. इस लिहाज से यह बिहार के नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा खतरा है. इधर बगहा वन प्रक्षेत्र अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची. जहां से मछुआरा द्वारा पकड़ी गयी मछली को बरामद कर वन क्षेत्र कार्यालय लाया गया है.

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