Bihar news: जोधपुर में ड्यूटी पर तैनात भोजपुर के सेना हवलदार की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 02 Jan 2025 8:42 PM
रोते बिलखते परिजन (File)
Bihar news: 2006 में आर्मी में बहाल हुए हरेंद्र सिंह का जोधपुर में निधन हो गया. इनके परिवार में पिता के अलावा पत्नी और तीन बच्चें हैं.
Bihar news: भोजपुर जिला के शाहपुर प्रखंड के सरना गांव निवासी आर्मी के हवलदार हरेंद्र कुमार सिंह की मौत जोधपुर में ड्यूटी के दौरान ही हो गई. परिवारजनों ने बताया कि हरेंद्र सिंह जोधपुर में आर्मी के एमसीए कोर में पोस्टेड थे जो भारतीय सेना के मेडिकल कोर में पड़ता है. बताया जा रहा है कि 31 दिसंबर की रात ड्यूटी के दौरान ही उन्हें चक्कर आया और वह गिर पड़े. जवानों द्वारा उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. हरेंद्र कुमार सिंह की मौत की खबर सुनकर परिवार वाले सदमें में हैं.

पूरे सम्मान के साथ दी गई सलामी
इलाज करने वाले आर्मी के चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था. इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. आर्मी के अधिकारियों द्वारा उनके परिवार वालों को बुलाकर घटना की जानकारी दी गई. साथ-साथ आर्मी द्वारा ही उनकी पत्नी एवं बेटे-बेटियों को आर्मी के देखरेख हवाई जहाज से गांव भेज दिया गया. दिवंगत हवलदार शहीद हरेंद्र सिंह की शव को जोधपुर के ही उनके बटालियन में उन्हें पूरे सम्मान के साथ सलामी दी गई.
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पूरा गांव गमगीन
बताया गया कि आज हवाई जहाज के माध्यम से शहीद का पार्थिव शरीर दानापुर आया. यहां से उन्हें आर्मी के जवान अपनी देखरेख में पूरे सम्मान के साथ पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव सरना लेकर पहुंचेंगे. हरेंद्र सिंह 2006 में आर्मी में बहाल हुए थे. इन्होने कई जगहों पर नौकरी की. इनके पिता सत्येंद्र नारायण सिंह भी आर्मी के सिपाही से रिटायर्ड होकर गांव पर ही रहते हैं. पुत्र के शहादत पर उन्होंने कहा की देश के लिए पुत्र न्यौछावर हो गया. वहीं, पत्नी रिंकी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है. शहीद जवान का एक पुत्र निखिल कुमार सिंह और दो बेटियां मानसी कुमारी व रीता कुमारी हैं. तीनों भाई -बहन अभी पढ़ रहे हैं. गांव के सपूत के मौत की खबर से पूरा गांव गमगीन हैं.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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