सिसकते हुए पिता को दी मुखािग्न सुबह सात बजे सड़क मार्ग से पहुंचा शव

Published at :02 Oct 2016 3:37 AM (IST)
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सिसकते हुए पिता को दी मुखािग्न सुबह सात बजे सड़क मार्ग से पहुंचा शव

शनिवार की सुबह पूरे राजकीय सम्मान के बाद सिसकियां लेते हेमंत ने अपने पिता शहीद राज किशोर को मुखाग्नि दी. इसके साथ ही कर्तव्य निभाने वाले शहीद राज किशोर सदा के लिए पंचतत्व में विलीन हो गये.सेना के 20 जवानों ने गोलियां दाग कर शहीद को सलामी दी. आरा : दानापुर कैंट से पूरे राजकीय […]

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शनिवार की सुबह पूरे राजकीय सम्मान के बाद सिसकियां लेते हेमंत ने अपने पिता शहीद राज किशोर को मुखाग्नि दी. इसके साथ ही कर्तव्य निभाने वाले शहीद राज किशोर सदा के लिए पंचतत्व में विलीन हो गये.सेना के 20 जवानों ने गोलियां दाग कर शहीद को सलामी दी.

आरा : दानापुर कैंट से पूरे राजकीय सम्मान के साथ सड़क मार्ग से शनिवार की सुबह सात बजे शहीद राज किशोर शव पीपरपांती गांव पहुंचा. गांव पहुंचने से पहले आरा-सरैया मुख्य मार्ग पर सैकड़ों लोग अपने चहेते राज किशोर की एक झलक पाने के लिए लालायित थे. कई स्थानों पर वीर राजकिशोर जिंदाबाद के नारे लगाये जा रहे थे.
दूसरी ओर पत्नी कंचन, मां अनुसूइया की चीत्कार से सबका कलेजा फट रहा था. लोग एक- दूसरे को समझाने में लगे हुए थे. तभी भीड़ को चीरती हुई एक बुजुर्ग महिला प्रवेश करती है और मृत्यु शैया पर लेटे शहीद राज किशोर को देख उनके मुंह से आवाज नहीं निकला और धड़ाम से जमीन पर गिर पड़ी. दूसरे परिजनों से पूछने पर पता चला कि यह बेहोश हुई बुजुर्ग शहीद राज किशोर की सास है.
जब शव को पकड़ कर राज किशोर की साली चीत्कार उठी, तो वहां खड़े हजारों लोग यही सोचने लगे कि आखिर भगवान ने इतना निर्दयी कदम क्यों उठाया.
मुखाग्नि के पूर्व अंतिम दर्शन करता शहीद का बेटा हेमंत.
खून का बदला खून चाहिए : कंचन
खून का बदला खून चाहिए मुझे. जिस तरह घर में घुस कर पाकिस्तान ने हमारे पति को
शहीद किया, उसी तरह खून का बदला खून लिया जायेगा, तब जाकर मेरे कलेजे को ठंडक पहुंचेगी और यह कहते-कहते फफक-फफक कर रो पड़ी. आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा था. उन आंसुओं के सैलाब के बीच कंचन ने आगे कहा कि मेरे पति की इच्छा थी कि मेरे दोनों बेटे और बेटी इंजीनियर बनें. उनके सपनों को अब सरकार को पूरा करना है. पांच लाख, दस लाख यह क्या है? सरकार दोनों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराये, ताकि मेरे पति के सपने पूरे हो सकें.
मूकदर्शक बनी सुहानी भी रो पड़ी
मां के साथ लिपट कर रोती सुहानी.
छह वर्षीया सुहानी अपने घर के पास खड़ी होकर लोगों को देख रही थी. वह मूकदर्शक थी. पिछले तीन दिनों से रोते-रोते उसका गला बंध गया था. अचानक शनिवार की सुबह हजारों लोगों की भीड़ देख वह यह नहीं समझ पा रही थी कि इतने लोग क्यों आये हैं. थोड़ी ही देर में जैसे ही जवानों ने शव लाकर उनके दरवाजे पर रखा. अपने पिता को ताबूत में लेटे देख चीत्कार कर उठी. उठअ पापा उठअ….
बेनी माधव ने कहा, बदला तो लूंगा ही : अपने भाई राजकिशोर को मृत्यु शैया पर लेटे देख
असम राइफल्स के जवान बेनी माधव सिंह से रहा नहीं गया और
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से तो बदला लेकर रहूंगा. दूसरे भाई नायक सूबेदार अशोक सिंह भी फूट-फूट कर रो रहे थे.
कमांडेंट ने कहा, गर्व है हमें ऐसे सपूत पर
शहीद राजकिशोर के शव के साथ पहुंचे डिप्टी कमांडेंट यशवंत कपूर, एडम कमांडेंट यशपाल डोरा, दानापुर रेंज के मेजर समेत तमाम सैन्य अधिकारियों ने शहीद की पत्नी कंचन देवी से मिल कर यह कहा कि मुझे गर्व है ऐसे सच्चे सपूत पर, जो कर्तव्य निभाने के दौरान शहीद हुआ.
बेहोश मां को होश में लाने का चल रहा था प्रयास : नौ माह कोख में तथा 40 साल के अपने लाल शहीद राज किशोर को पालने वाली मां अनुसूइया का बेटा राज किशोर ताबूत में मृत्यु शैया पर पड़ा हुआ था.
उस मां कलेजा छलनी- छलनी हो गया. बेटे को देख बेहोश हुई अनुसूइया का कलेजा शायद फट गया था. इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी. जब कोख से जन्म देने वाली मां के सामने उसका बेटा चुपचाप पड़ा था, जो कुछ ही क्षणों के बाद हमेशा के लिए आंखों से ओझल होने वाला था. बेहोश मां अनुसूइया को होश में लाने का काम चल रहा था.
मंत्री से लेकर संतरी तक ने शहादत को किया सलाम
शहीद राज किशोर का शव उनके पैतृक गांव पीपरपांती पहुंचा. उसके बाद शहीद को सलामी देने का कार्य शुरू हुआ. बिहार सरकार के उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह, प्रभारी मंत्री विजय प्रकाश, आरा विधायक अनवर आलम, संदेश विधायक अरुण यादव, बड़हरा विधायक सरोज यादव के अलावा पूर्व सांसद मीना सिंह, जदयू के वरीय नेता भाई ब्रह्मेश्वर, पूर्व विधायक भाई दिनेश, नरगदा पंचायत के मुखिया पति राजेंद्र सिंह समेत तमाम लोगों ने रिथलेइंग कर उनकी शहादत को याद किया.
गूंजता रहा जब तक सूरज-चांद रहेगा …
शहीद राज किशोर के शव को जैसे ही उनके पैतृक गांव पीपरपांती में लाया गया, युवा उसी समय से नारा लगाते रहे, जबतक सूरज चांद रहेगा, तब तक राज किशोर तेरा नाम रहेगा. युवाओं में गुस्सा इतना था कि वे चिल्ला रहे थे पाकिस्तान से बदला लो. हिंदुस्तान जिंदाबाद. पाकिस्तान मुरदाबाद.
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